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वा’स्तुशास्त्र के अनु’सार ये 7 गल’तियां क’रने प’र न’हीं टिक’ता घ’र में पै’सा, जा’निए क’हीं आ’प तो न’हीं क’रते ये…

धार्मिक खबर

अ’क्सर ह’म स’भी ए’क बा’त का अनु’भव ज’रूर क’रते हैं कि अ’चानक मेह’नत से क’माया हु’आ ध’न अधि’क ख’र्च हो’ने लग’ता है। य’ह ख’र्च फि’जूल, कि’सी को उ’धार दे’ने या फि’र बीमा’रियों के इ’लाज हो’ने प’र ब’ढ़ जा’ता है।

घ’र में लगा’तर पा’नी की बर्बा’दी हो’ना जै’से, घ’र की टंकि’यों से अ’नावश्यक पा’नी का बह’ना, न’ल की टोटि’यों से लगा’तर पा’नी का टप’कना वा’स्तु में अ’शुभ मा’ना ग’या है। इ’ससे चंद्र’मा कम’जोर हो’ता है जि’ससे ध’न हा’नि औ’र स्वा’स्थ्य सं’बंधी परेशा’नियां आ’ती हैं।

घ’र प’र र’खी हु’ए घ’ड़ियां क’भी रु’की न’हीं हो’नी चा’हिए। इस’से घ’र में नका’रात्मक ऊ’र्जा का विस्ता’र हो’ता है औ’र कि’सी भी का’र्य में सफ’लता दे’र त’क मिल’ती है। 

घ’र का मु’ख्य द्वा’र हमे’शा सा’फ औ’र सुं’दर रख’ना चा’हिए। शा’म के व’क्त इ’स ज’गह प’र हमे’शा रौ’शनी हो’नी चा’हिए। य’हाँ प’र अंधे’रा रख’ना बेह’द अ’शुभ मा’ना जा’ता है।

वा’स्तु में सू’खे पौ’धे निरा’शा का प्रती’क मा’ने ग’ए हैं,ये तर’क्की में बा’धा बन’ते हैं। य’दि आ’पने अ’पने घ’र के आँ’गन में पौ’धे ल’गा र’खे है तो उन’की उ’चित देख’भाल क’रें।