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दुनि’या का स’बसे अनो’खा पे’ड़: जि’से का’टने प’र बह’ने लग’ता है इंसा’नों जै’सा खू’न, फू’लों में से आ’ती है रो’ने की आ’वाज, दे’खिए…

हिंदी खबर

अ’क्सर ह’में सु’नने को मिल’ता है कि पे’ड़-पौ’धों में भी जा’न हो’ती है, वो भी इंसा’नों की त’रह सां’स ले’ते हैं, ले’किन लो’ग उ”न्हें का’टते सम’य ये बा’त भू’ल जा’ते हैं। अ’ब ज’रा सो’चिए कि अ’गर आ’पने को’ई पे’ड़ का’टा औ’र उस’से इं’सानों की त’रह की ला’ल रं’ग का खू’न निक’लने ल’गे तो? यकी’नन आ’प ऐ’सा नजा’रा देख’कर ड’र जा’एंगे, क्यों’कि इस’की उम्मी’द आ’पने क’भी ही न’हीं हो’गी। ले’किन आ’ज ह’म आप’को ए’क ऐ’से पे’ड़ के बा’रे में ब’ताने जा र’हे हैं, जि’से का’टने प’र इंसा’नों की तर’ह की खू’न निक’लता है। ज्या’दातर लो’ग तो इ’स पे’ड़ के बा’रे में जा’नते भी न’हीं हैं, ले’किन जो जा’नते हैं वो इ’से ‘जा’दुई’ मा’नते हैं।

द’क्षिण अफ्री’का में पा’ए जा’ने वा’ले इ’स बे’हद ही खा’स औ’र अ’नोखे पे’ड़ को लो’ग ‘ब्लड’वुड ट्री’ के ना’म से जा’नते हैं। इ’से औ’र भी क’ई ना’मों से जा’ना जा’ता है, जै’से कि- कि’आट मु’कवा, मुनिं’गा। इस’का वैज्ञा’निक ना’म ‘सेरो’कारपस एंगो’लेनसिस’ है। य’ह अनो’खा पे’ड़ मो’जाम्बिक, ना’मीबिया, तंजा’निया औ’र जिम्बा’ब्वे जै’से दे’शों में भी पाया जा’ता है।

ऐ’सा न’हीं है कि ‘ब्लड’वुड ट्री’ को सि’र्फ का’टने प’र ही खू’न निकल’ता है। इस’की अ’गर डा’ली टू’ट भी जा’ए तो भी उ’स ज’गह से खू’न नि’कलने लग’ता है। अस’ल में य’ह ग’हरे ला’ल रं’ग का ए’क तर’ल पदा’र्थ हो’ता है, जो दे’खने में बिल्कु’ल खू’न जै’सा हो’ता है।

इ’स अ’नोखे पे’ड़ की लं’बाई 12 से 18 मी’टर त’क हो’ती है। पे’ड़ के ऊ’पर प’त्तों और टह’नियों का आ’कार इ’स त’रीके से ब’ना हो’ता है जै’से व’हां को’ई छ’तरी ल’गी हो। इस’के प’त्ते का’फी घ’ने हो’ते हैं औ’र इस’पर पी’ले रं’ग के फू’ल खि’लते हैं। इस’की लक’ड़ी से का’फी म’हंगे-म’हंगे फर्नी’चर ब’नाए जा’ते हैं। इ’सकी लक’ड़ी का खा’सियत ये है कि वो आ’सानी से मु’ड़ जा’ती है औ’र ज्या’दा सिकु’ड़ती भी न’हीं।

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लो’ग इ’से जा’दुई पे’ड़ भी मा’नते हैं, क्यों’कि इस’का इस्तेमा’ल द’वाई के रू’प में भी कि’या जा’ता है। य’ह इंसा’नों के खू’न संबं’धी बीमा’रियों को ठी’क क’र दे’ता है। इस’में दा’द से ले’कर आं’खों की परे’शानी, पे’ट की स’मस्या, म’लेरिया औ’र गं’भीर चो’टों को भी ठी’क क’रने की ताक’त है।