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य’दि आ’पका पा’र्टनर आ’पके सा’थ न’हीं कर’ता ये का’म, तो क’रें ब’स इ’तना…

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आ’जकल की जीव’नशैली में त’नाव हो’ना बहु’त सा’मान्य बा’त है। कि’सी भी व्य’क्ति को त’नाव कि’सी भी व’क्त हो स’कता है। ऐ’से स’मय में साम’ने वा’ले को सब’से ज्या’दा आ’वश्यकता ऐ’से व्य’क्ति की हो’ती है जिस’से वो सब’से अ’धिक प्रे’म कर’ता है। ले’किन साम’ने वा’ले व्य’क्ति को क’ई बा’र स’मझ न’हीं आ’ता है कि इ’स प’रिस्थिति का सा’मना कै’से कि’या जा’ए क्यों’कि तना’व से ग्र’सित व्य’क्ति का व्यवहा’र इ’न दि’नों बहु’त अजी’ब हो जा’ता है। ऐ’से में आ’प कि’सी मनो’चिकित्सक की स’हायता य’ह जा’नने के लि’ए भी ले सक’ते हैं कि आ’पको सा’मने वा’ले व्य’क्ति के प्र’ति अ’भी कि’स त’रह का व्य’वहार अप’नाना हो’गा। अग’ली स्ला’इड्स से जा’निए कि कि’स त’रह से सहाय’ता क’रके आ’प अप’ने पार्ट’नर को तना’व से बा’हर ला स’कते हैं। 

अ’केला न छो’ड़ें
ऐ’से स’मय में गल’ती से भी अप’ने पार्ट’नर को अ’केला न छो’ड़ें क्यों’कि अ’केले छो’ड़ दे’ने प’र उ’न्हें ऐ’सा ख्या’ल आ स’कता है कि उ’नका तो को’ई है ही न’हीं। ओवर’थिंकिंग कर’के वे अप’नी स’मस्या को का’फी ह’द त’क ब’ढ़ा लें’गे। य’दि पा’र्टनर आ’पके सा’थ न’हीं रह’ते हैं तो को’शिश क’रें कि फो’न की सहाय’ता से ज्या’दा से ज्या’दा स’मय आ’प उ’नसे जु’ड़े र’हें। उन’से सा’री सका’रात्मक बा’तें क’रें। 

बा’तों को खु’द प’र न लें
तना’व की इ’स स्थि’ति में य’दि आप’का पार्ट’नर आप’से को’ई बा’त सा’झा क’र र’हा है तो खु’द प’र उ’से न लें क्यों’कि आ’प इ’स बा’त को सम’झिए कि साम’ने वा’ला जो भी बा’त क’ह र’हा है वो उ’स वि’षय में स’ही त’रीके से सो’चने- समझ’ने की स्थि’ति में न’हीं है फि’लहाल तो ऐ’से सम’य में को’शिश क’रें कि आ’प उन’की बा’तों को ब’स सु’नते र’हें औ’र वि’श्वास दि’लाएं कि आ’प स’ब सम’झ र’हे हैं औ’र सब’कुछ ज’ल्द ही बेह’तर भी हो’गा। 

का’म में हा’थ ब’टाएं
डिप्रेश’न का म’रीज शारी’रिक रू’प से भी कम’जोर हो’ने ल’गता है। ऐ’से में जो का’म वो सा’मान्य दि’नों में ए’क घं’टे में क’र दि’या क’रता था, व’ही का’म कर’ने में अ’ब उ’से दो’गुना स’मय ल’ग स’कता है। ऐ’से में वो खु’द से औ’र भी ज्या’दा नाखु’श हो सक’ता है इस’लिए कोशि’श क’रें कि आ’प अ’पने पा’र्टनर का ज्या’दा से ज्या’दा का’मों में हा’थ ब’टाएं ता’कि वे खु’द को कम’जोर न स’मझें औ’र उन’का का’म भी सम’य से हो जा’ए।