Categories
News

कि’शोरावस्था में अ’गर आ’पके ब’च्चें भी कर’ने ल’गें है ये का’म, आ’गे चल’कर हो’गी ब’ड़ी परे’शानी, इस’लिए अ’भी दू’र क’रें ये…

हिंदी खबर

ब’च्चे जै’से- जै’से ब’ड़े हो’ते हैं, उन’में बहु’त सा’रे परि’वर्तन आ’ते हैं। स’ब से ज्या’दा जो परि’वर्तन चिं’ता का वि’षय बन’ता है वो है व्यव’हार। बढ़’ते ब’च्चे अक्स’र चि’ढ़चिढ़े हो’ने ल’गते हैं, उ’न्हें बा’र-बा’र लग’ता है कि उ’न्हें को’ई सम’झता न’हीं है। हा’र्मोनल परिव’र्तनों के कार’ण भी वे थो’ड़े अ’जीब से हो’ने ल’गते हैं। ब’च्चे छो’टे हो’ते हैं तो वे अ’पने म’म्मी- पा’पा की बा’त को सु’नते हैं लेकि’न क’ई सा’रे ब’च्चे ब’ड़े हो’ने के बा’द अप’ने मा’ता-पि’ता को पलट’कर ज’वाब दे’ने लग’ते हैं, उ’नकी बा’तों को मान’ते न’हीं है, जो कि अ’च्छी आ’दत न’हीं है क्यों’कि आ’गे चल’कर य’ह आ’दत उ’न्हीं का भ’विष्य प्रभा’वित क’र स’कती है। अग’ली स्लाइड्’स से जा’निए कि कि’स तर’ह से ब’च्चों की इ’स आ’दत को सु’धारा जा’ए।

टोक’ना छो’ड़ दें
क’ई बा’र ब’च्चे ज’ब कि’सी ए’क ही बा’त से ब’हुत ज्या’दा चि’ढ़ जा’ते हैं तो वे ए’कदम से उ’ठाकर अ’पने ब’ड़ों को जवा’ब दे दे’ते हैं इ’सलिए ब’च्चे की उ’म्र के हि’साब से मनो’स्थिति को सम’झें। उ’से ए’क ही बा’त के लि’ए बा’र-बा’र टो’कना छो’ड़ दी’जिए क्यों’कि आ’प ए’क ही बा’त बा’र-बा’र कहें’गे तो उन’के म’न में तर’ह-त’रह के वि’चार आएं’गे कि आ’प उन’के सा’थ ऐ’सा क्यों क’र र’हे हैं इ’सलिए इ’स आ’दत को छो’ड़ दें।

ज्या’दा स’वाल- ज’वाब न क’रें
ब’च्चे से ब’हुत छो’टी-छो’टी ची’जें भी गंभीर’ता से बा’र-बा’र न पू’छें जै’से कि य’दि वो क’हीं बा’हर ग’या थो तो क’हां ग’या था पूछ’ना आप’का ह’क है लेकि’न क्या लड़कि’यों के सा’थ ग’या था औ’र क्या ज’रूरत थी जा’ने की, जै’से सवा’लों को पूछ’कर आ’प उ’से कु’छ उ’ल्टा जवा’ब दे’ने के लि’ए खु’द से मज’बूर क’र र’हे हैं क्यों’कि ऐ’सा कर’ने प’र उ’से मह’सूस हो स’कता है कि आ’प उस’पर वि’श्वास न’हीं क’रते हैं। 

हां या न क’हने का ही मौ’का दें
य’दि आ’प ब’च्चे को को’ई का’म ब’ता र’हें हैं या कु’छ जा’नना चा’ह र’हे हैं तो अ’पने सवा’ल को इ’स त’रह से प्रस्तु’त क’रें कि व’ह ब’च्चे प’र नका’रात्मक प्रभा’व न डा’ले औ’र सा’थ ही वो आ’पको हां या न में ही ज’वाब दे स’के। उ’से बहु’त अधि’क बहाने’बाजी कर’ने का मौ’का ही न दें। जै’से कि आ’प इ’स त’रह से का’म ब’ता स’कते हैं कि ‘बे’टा, मैं बा’हर जा र’ही हूं तो तु’म दू’ध तो ले ही लो’गे न’? ऐ’सी स्थि’ति में ब’च्चा उ’ल्टा जवा’ब दे’ने के बा’रे में सो’च ही न’हीं सके’गा।

अ’पनी बा’त क’हने का मौ’का दें
ब’च्चे के म’न में ब’हुत सा’रे सवा’ल हो’ते हैं, संश’य हो’ते हैं। ऐ’से में ये आ’पकी जिम्मेदा’री है कि आ’प ब’च्चे को स’मय औ’र ऐ’सा मा’हौल दें कि वे अ’पनी बा’त को अ’च्छे से आ’पसे सा’झा क’र स’कें। इ’स बा’त को सम’झिए कि य’दि उ’न्हें ऐ’सा वाता’वरण न’हीं मिल’ता है तो वे फि’र आ’पके खा’ना खा लि’या? जै’से सवा’लों प’र भी उख’ड़कर ही ज’वाब दें’गे क्यों’कि उ’नके दिमा’ग में ज’रूर कु’छ च’ल र’हा है।