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बसंत पंचमी के दिन पीले कपड़े ही क्यों पहने जाते है, जानें इसका महत्व

बसंत पंचमी के दिन पीले कपड़े पहनने का महत्व क्या होता हैं?  हमारी भारतीय संस्कृति में त्योहारों और व्रतों को काफी महत्व दिया जाता हैं. हमारे देश भारत में लोगों के अंदर पूजा- पाठ में खूब आस्था और विश्वास होता हैं . जैसे हम लोग शिवरात्रि में व्रत और पूजा करते है वैसे ही बसंत पंचमी भी एक बड़ा पर्व हैं.  आज हम आपको बताते है कि इस साल यानी की 2020 में बसंत पंचमी किस दिन होगी और इस दिन सिर्फ पीले कपड़े ही क्यों पहने जाते हैं. इसका क्या महत्व है इस बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं.

इस दिन क्यों होती है माँ सरस्वती की पूजा

बसंत पंचमी के दिन साहित्य, शिक्षा, कला के  क्षेत्र से जुड़े लोग माँ सरस्वती की पूजा-आराधना करते हैं। इस दिन माँ सरस्वती की पूजा दोपहर के समय की जाती हैं. इस साल 2020 में ये पर्व 29 जनवरी को मनाया जायेगा। इस दिन पंचमी तिथि का प्रारंभ सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर होगा.  

इस पर्व पर माँ  सरस्वती की पूजा में हल्दी का उपयोग विशेष रूप से किया जाता हैं. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन  पवित्र नदी में स्नान करना बहुत ज्यादा फलदायी होता हैं. इस दिन विद्या और शिक्षा की मां सरस्वती की  पूजा के समय पीले या फिर  सफेद फूलों का इस्तेमाल ज़रूर किया जाता हैं.

प्रसाद में किन-किन चीजों का होता है इस्तेमाल

दोस्तों,आपकी जानकारी के लिए बता दें, की जिन लोगों को नहीं मालूम कि इस व्रत में प्रसाद में किन चीजों का इस्तेमाल होता है तो, हम आपको बताते है कि इस पर्व के दिन पूजा के प्रसाद में गाजर , कोई भी पीला फल, बेर, खीरा आदि , इन सब चीजों को ज़रूर रखना चाहिए.

क्यों मनाया जाता है ये त्यौहार

ऐसा माना जाता है कि इस दिन पीले कपड़े धारण करने चाहिए. ये भी कहा जाता है कि विशेष तौर पर इस दिन विद्या से जुड़ी किसी भी चीज़ का भूलकर भी अपमान ना करें. इस पर्व को हरियाली का त्यौहार माना जाता हैं. इस वजह से इस त्यौहार के वक़्त फसलों की कटाई वगरह का काम भी नहीं किया जाता हैं. ऐसा कहा जाता है, कि इस दिन किसी को मासंहारी भोजन और मदिरा वगरह का सेवन बिलकुल भी नहीं करना चाहिए.

क्यों पहने जाते हैं पीले कपड़े

दोस्तों, बसंत पंचमी  के दिन पीला रंग पहनना शुभ माना जाता है. इसके पीछे दो महत्वपूर्ण कारण भी हैं. पहला कारण है कि बसंत को ऋतुओं का त्यौहार माना जाता है. क्योंकि बसंत पंचमी के दिन से कड़कड़ाती ठंड खत्म होने लगती है और मौसम सुहावना होने लगता हैं.  हर तरफ पेड़-पौधों पर नई पत्तियां, फूल-कलियां खिलने लग जाती हैं. गांवों में तो इस मौसम में सरसों की फसल की वजह से धरती पीली नज़र आती है.ये नज़ारा बहुत ही सुंदर लगता हैं. इस पीली धरती वाली बात को ध्यान में रखते हुए लोग बसंत पंचमी का स्वागत पीले कपड़े पहनकर करते हैं.

वहीं, दूसरा कारण ये है कि बसंत पंचमी के दिन सूर्य उत्तरायण होता हैं. जिसकी पीली किरणें इस बात का प्रतीक है कि हमें सूर्य की तरह गंभीर और प्रखर बनना चाहिए.  इन्हीं दो वजहों के चलते  बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का खास महत्व होता हैं. इस दिन पूजा का प्रसाद और खाना भी पीले रंग का ही बनता हैं.

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