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इस एक गल’ती की व’जह से 90% लोगों को आता है हा’र्ट अटै’क, सच जानकर हो जाएंगे हैरा’न…

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एक्स’पर्ट के अनु’सार-अधि’कतर लो’गों को बा’थरूम में हा’र्ट अटै’क आ’ता है या ऐ’से क’हें कि बाथ’रूम ही हा’र्ट अटै’क को ज’न्म दे’ता है। आ’प सो’च र’हे हों’गे कि ऐ’सा बाथ’रूम में क्या है। चलि’ए ह’म बता’ते हैं -एक्सप’र्ट के अ’नुसार लग’भग 99 प्रति’शत लो’ग नहा’ते सम’य सब’से प’हले पा’नी सि’र प’र डा’लते हैं कि’न्तु य’ह ब’हुत ही गा’लत है। दरअस’ल हो’ता ऐ’सा है कि ज’ब भी ह’म अचा’नक सि’र प’र पा’नी डा’लते हैं तो सि’र की न’से संकु’चित या’नी सि’कुड़ जा’ती हैं।

लगा’तार ऐ’सा कर’ने से सि’र की न’सें इत’नी ज्या’दा सि’कुड़ जा’तीं हैं कि र’क्त सं’चार रु’क जा’ता है औ’र परि’णाम क्या हो’ता है आ’प खु’द जान’ते हैं।
अ’ब जा’नते हैं न’हाने का स’ही तरी’का

नहा’ते स’मय सब’से प’हले पै’रों प’र औ’र उस’के बा’द धी’रे -धी’रे ऊ’पर की त’रफ पा’नी डाल’ते हैं। अं’त में ज’ब हमा’रा पू’रा शा’रीर उ’स टेम्प्रे’चर को एडा’प्ट क’र ले’ता है त’ब सि’र प’र पा’नी डा’लना चा’हिए।

उदाह’रण -अग’र पै’रों प’र लगा’तार पा’नी डाल’ने से पै’रों की न’से संकु’चित हो जा’तीं हैं तो पै’र का’म क’रना बं’द क’र दे’गा कि’न्तु उस’का इला’ज क’राया जा सक’ता है कि’न्तु सि’र के माम’ले में र’क्त संच’रण रु’क जा’ने के कार’ण तुरं’त मौ’त हो सक’ती है।