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फां-सी नहीं इस स-ज़ा से म-रते देखना चाहती थी नि-र्भ-या अपने दो-षि-यों को

आपको तो पता ही हैं 7 साल से चलते आ रहे इस के-स का फायनली सुनवाई हो ही गयी. नि-र्भ-या के दो-षि-यों को आज सुबह 5: 30 में फां-सी पर लट-का दिया गया. SDM उषा चतुर्वेदी ने खु-ला-सा किया हैं नि-र्भ-या अपने दो-षि-यों को फां-सी के द्वारा नहीं बल्कि किसी और तरह से म-रते देखना चाहती थी. आइये आपको बताते हैं.

“21 दिसंबर को मैं एक से डेढ़ घंटे नि-र्भ-या के साथ थी। बहुत से सवाल-जवाब हुए लेकिन मुझे उसकी एक बात बार-बार याद आती है और वह यह कि जब मैंने उससे पूछा कि अब तुम क्या चाहती हो? तो उसका पहला जवाब था कि सभी को फां-सी मिले लेकिन थोड़ी ही देर रुककर वह बोली कि नहीं..फां-सी नहीं..सभी को जिं-दा ज-ला देना चाहिए। कुछ शब्द और कुछ इशारों के साथ जब वो यह कह रही थी तो इसमें उन आ-रो-पि-यों के लिए उसका गु-स्सा और न-फ-र-त मैं महसूस कर सकती थी।”

उस दिन को याद करते हुए उषा चतुर्वेदी बताती हैं, “जब पहली बार नि-र्भ-या को देखा तो अंदाजा लग गया था कि उसके साथ किस ह-द तक द-रिं-द-गी हुई होगी। उसे ऑक्सीजन मॉस्क लगा हुआ था,लेकिन वो मुझे टकटकी लगाकर देख रही थी, शायद इस उम्मीद में कि मैं उसे न्या-य दिला सकूं। मैं एक से डेढ़ घंटे नि-र्भ-या के साथ थी। इस थोड़े से समय में ही मुझे यह पता चल गया था कि वह न्या-य तो चाहती ही थी लेकिन जीना भी चाहती थी.

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