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पिता के गुजर जानें के बाद चिराग के सामने आयी ये बड़ी चुनौती , कैसें निपटेगें चिराग???👇

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केन्द्रीय मंत्री तथा लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान के नि’धन से बिहार की राजनीति में भू’चाल आ गया है, द’लित रा’जनीति की आवाज बुलंद करने वाला एक र’ह’नुमा भी चला गया, खास बात ये है कि साल 1990 के पिछड़ा उ’भार के दौ’र से आगे निकल रामविलास ने जिस तरह समाज के हर वर्ग से तालमेल बिठाया और द’लि’त रा’जनी’ति को अपना आधार बनाये रखा, जा’हिर तौ’र पर चिरा’ग के सामने यही सबसे बड़ी चु’नौ’ती होगी, ऐसे समय में जब पिता का साया सिर से उठ गया, तो सियासत की उस वि’रा’सत को कै’से बर’करा’र रखा जाए, इसके साथ ही घर के बड़े लड़के होने के साथ लोजपा अध्यक्ष के तौर पर चि’राग के साम’ने अन्य कई चुनौतियां मौजूद है।

पहली चुनौती तो ये है कि जिस तरह रामविलास पासवान अपने पूरे परिवार को (जिनमें उनके भाई-भतीजे तथा तमाम सगे संबंधी शामिल हैं) एकजुट रखा था, अधिकतर लोगों को राजनीति में लेकर आये, इस स्थिति में चि’राग को अपने परिवार को स’मेट कर और सहेज कर रखना आ’सान नहीं होगा, क्योंकि प’रिवा’र में ज्यादा मत’भेद सामने आते हैं।


दूसरी चु’नौती


चिराग के सामने दूसरी चु’नौती ये होगी कि पार्टी को एकजुट रखना होगा, इसके साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं को मो’टिवेट करने से लेकर उन्हें पिता की तरह संतुलन बिठाकर चलने वाले नेता के तौ’र पर अपनी पहचान बनानी होगी, अब ऐसा माना जाता रहा है कि चिराग अपने कार्यकर्ताओं से ज्यादा घुलते-मिलते नहीं हैं, लेकिन पिता के जाने के बाद उन पर ये जिम्मेदारी बनती है, कि लोगों के सु’ख-दु’ख में शा’मिल हो।


तीसरी चुनौती


चिराग के सामने तीसरी बड़ी चुनौती ये है कि जिस तरह हाल ही में उन्होने सीएम नीतीश पर ह’म’ला बोलते हुए एनडीए से अलग होने का फै’सला लिया था, इससे नीतीश और चिराग के बीच काफी ख’टास दिख रही है, सी’एम द्वारा हाल ही में कही गई बातों से लगता है कि आने वाले समय में वो केन्द्र पर ये दबाव भी बना सकते हैं कि चि’राग को ए’नडी’ए से बाहर नि’का’ला जाए, हालांकि ये कयास हैं लेकिन रा’ज’नी’ति’क स’मी’क्ष’क मा’नते हैं कि ऐसी किसी भी आ’शंका से नि’पटने के लिये चिराग को तै’या’र रहना होगा।