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कांग्रेसी नेता कमलनाथ ने मध्यप्रदेश में अपनी सरकार को बचाने के लिए चली नयी चाल

मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं, कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के कुछ नेताओं को इसके समाधान और भोपाल में स्थिति को संभालने का काम सौंपा है. इससे पहले, सोनिया गांधी ने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता हरीश रावत के साथ बैठक की. पार्टी ने सज्जन सिंह वर्मा और गोविंद सिंह को बेंगलुरु में बैठे कुछ बागी विधायकों को अपने पक्ष में करने के लिए भेजा गया है. इसी बात को लेकर अब कमलनाथ ने अपनी सरकार को बचाने के लिए नयी चाल चली हैं. आइये आपको बताते हैं.

संभावना ये जताई जा रही है कि विधानसभा अध्यक्ष 22 में से 21 विधायकों के इस्तीफे को अस्वीकार कर देंगे. इसके पीछे बड़ी वजह ये है कि इस्तीफे में राज्य विधानसभा शब्द लिखा ही नहीं गया है, 22 विधायकों में से एक मात्र बिजेंद्र सिंह यादव ऐसे विधायक हैं जिन्होंने अपने पत्र में विधानसभा शब्द का इस्तेमाल किया है. बाकी सभी विधायकों ने केवल सभा लिखा है जिसके चलते अब कांग्रेस नया दांव चल सकती है. विधानसभा के अधिकारियों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि इस बात के आधार पर इन विधायकों के इस्तीफे अस्वीकार हो सकते हैं.

वहीं दूसरी कारण ये भी बताया जा रहा है कि इन विधायकों ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर नहीं बल्कि ईमेल के माध्यम से इस्तीफे दिए हैं. अब कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष के सामने बुधवार को एक याचिका पेश करते हुए कहा है कि इस्तीफा देने वाले 22 विधायकों में से 6 विधायकों को अयोग्य ठहरा दिया जाए. बताया जा रहा है कि इस्तीफा देने वाले मंत्री और विधायक बेंगलुरु के एक रिजोर्ट में ठहरे हैं वहीं से इन्होने ईमेल करके अपने इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष को भेजे हैं.

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