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भारत में कोरोना वायरस के रूप में हुआ ये बदलाव, जाँच में जुटी है ICMR की टीम

कोरोना वायरस नाम की इस बीमारी के कारण पूरे विश्व के देशों में आतंक मचा हुआ हैं. इस वायरस से काफी लोगों की जान भी चली गयी और बहुत से लोग ठीक भी हुए हैं. भारत में इस वायरस के वजह से लॉकडाउन किया हैं, ताकि लोग अपने घरों में रहे और सुरक्षित रहे. कोरोना वायरस के लक्षण ये हैं कि अगर किसी को सर्दी खांसी के साथ बुखार हैं तो कोरोना के लक्षण हो सकते हैं. भारत में कोरोना वायरस के रूप में बदलाव हुआ हैं जिसे ICMR की टीम ने दावा किया हैं, आइये जानते हैं किस रूप में पहुँच चुका हैं कोरोना.

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) यह अध्ययन करने की योजना बना रही है कि देश में पिछले दो महीनों में कोविड-19 के फैलने के दौरान क्या कोरोना वायरस में ‘म्यूटेशन’ हुआ है। ‘म्यूटेशन’ का अर्थ है किसी भी कोशिका में आनुवंशिक परिवर्तन। देश की शीर्ष स्वास्थ्य अनुसंधान संस्था के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के मुताबिक ‘सार्स-कोवी 2 स्ट्रेन’ में बदलाव हुआ है या नहीं, इसका पता चलने पर किसी संभावित टीके के प्रभावी होने को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा, ‘अध्ययन से यह संकेत मिलेगा कि क्या यह और अधिक जानलेवा हो गया है और क्या उसके संक्रमण फैलाने की क्षमता बढ़ गई है।’ वैज्ञानिक ने कहा कि कोविड-19 मरीजों से एकत्र किये गये नमूनों का अध्ययन यह पता लगाने के लिये किया जाएगा कि कोरोना वायरस में आनुवंशिक परिवर्तन हुआ है, या नहीं। वैज्ञानिकों के मुताबिक लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही अध्ययन शुरू किया जा सकेगा क्योंकि अभी विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से नमूने एकत्र करने में मुश्किलें हैं।

भारत में अब तक तीन स्वरूपों का पता चला है। एक वुहान से है जबकि अन्य इटली और ईरान से है।आईसीएमआर में महामारी एवं संक्रामक रोग विभाग के प्रमुख डॉ आर गंगाखेडकर ने इससे पहले कहा था, ‘म्यूटेशन से टीके के निष्प्रभावी होने की संभावना नहीं है क्योंकि वायरस के सभी उप प्रकारों की एक जैसी ही एंजाइम होती है। साथ ही, इसमें बहुत तेजी से बदलाव नहीं आ रहा है।’ कोविड-19 के टीके पर छह भारतीय कंपनियां काम कर रही है।

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