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दिल्ली हिं’सा: बंदू’क़ ताने दं’गाई के सामने डटकर खड़े हुए हेड कांस्टेबल ने बताया उस वक्त…

उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले में भड’क़ी हिं’सा में शाहरुख़ नाम के दं’गाई ने दिल्ली पुलिस के हवलदार दीपक दहिया पर लोडिड पिस्टल तानी थी। दीपक उसके सामने बिना डर के उसका सामना किया लेकिन बेखौफ शाहरुख हवा में गोलियां चलाता हुआ मौके से फरार हो गया, जो अभी तक पुलिस को नहीं मिला है।  दिल्ली पुलिस के इस हेड कॉन्स्टबल की बहादुरी के चर्चे हर तरफ हो रहे हैं. 

31 साल के दीपक दहिया ने कहा, दरअसल सोमवार को मेरी इमरजेंसी ड्यूटी उत्तर पूर्वी दिल्ली जिले में लगा दी गई। वैसे मैं हवलदार की ट्रेनिंग बजीराबाद स्थित दिल्ली पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में ले रहा हूं। दिल्ली पुलिस में मैं सन् 2012 में सिपाही के पद पर भर्ती हुआ था। सोनीपत (हरियाणा) के रहने वाले दीपक दहिया ने बताया उनके पापा कोस्ट गार्ड में नौकरी करते थे दो छोटे भाईयों में से एक भाई दिल्ली पुलिस में ही सिपाही है, जबकि दूसरा भाई कोस्ट गार्ड में ही सेवारत है।

दीपक ने बताया कि हम लोगों को जब ट्रेनिंग दी जाती है, तब बताया जाता है कि अपनी जान से पहले आम लोगों की जिंदगी बचाने के बारे में सोचें. अपनी ट्रेनिंग में मिली सीख के बाद ही मैं आगे बढ़ गया. दीपक ने कहा कि मैं नहीं चाहता था कि उसकी पिस्टल के सामने कोई आम आदमी आए इसलिए मैं उसके सामने आकर खड़ा हो गया.

हवलदार दीपक दहिया ने बताया – ‘इन दिनों मेरी बजीराबाद स्थित दिल्ली पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में हवलदार पद की ट्रेनिंग चल रही ही। जिस दिन नार्थ ईस्ट डिस्ट्रिक्ट में सोमवार को हिंसा हुई तो हमारे सेंटर से भी जवानों को मौके पर बुला लिया गया। मैं भी अपने कुछ साथियों के साथ उस दिन मौके पर ड्यूटी कर रहा था। उसी वक्त अचानक मेरे ठीक सामने लाल मैरून टी शर्ट पहने एक लड़का अंधाधुंध गोलियां चलाता हुआ आ गया।

दिल्ली पुलिस के इस बहादुर जांबाज ने आगे बताया, वो युवक देखने में पढ़ा लिखा जरूर लग रहा था। पहनावे से भी ठीक ठाक दिखाई दे रहा था। जब उसे हाथ में रिवाल्वर से खुलेआम पुलिस और पब्लिक को टारगेट करते हुए गोलियां चलाते देखा तब उसकी हकीकत का अंदाजा मुझे हुआ, मैं समझ गया कि इससे बेहद सधे हुए तरीके से ही निपटा जा सकता है। वरना एक लम्हे में वो मेरे सीने में गोलियां झोंक देगा। उन्होंने कहा, मेरे हाथ में एक लाठी थी। उसके हाथ में लोडिड रिवाल्वर। फिर भी मैंने उसे अपनी बॉडी लैंग्वेज से यह आभास नहीं होने दिया कि, मैं उससे डरा हूं। बल्कि उसे यह अहसास दिलाने की कोशिश की कि, मैं अपने हाथ मे मौजूद लाठी से ही उसके हमले को नाकाम कर दूंगा। उसे जब लगा कि मैं पीछे हटने वाला नहीं हूं, तो वो खुद ही गोलियां दागता हुआ मौके से फरार हो गया।

पूछने पर कि वो युवक कौन था? बहादुर और समझदार हवलदार दीपक ने कहा, उस वक्त तो नहीं पता चला। बाद में सीसीटीवी और मोबाइल फुटेज मंगाई गयी। सीसीटीवी फुटेज देखने पर उसे जानने वालों ने बताया था कि, वो कोई उसी इलाके का गुंडा टाइप शाहरुख है। दीपक से जब पूछा तुम्हें हाथ में सामने लोडिड रिवाल्वर लिये खड़े युवक से डर नहीं लगा? तो जवाब में उन्होंने कहा, अगर मैंने उसे अपने डर जाने का अहसास करा दिया होता तो शायद आज कहानी कुछ और होती। मैं आपसे बात करने के लिए ही नहीं बचा होता। उसे मैंने हिम्मत के साथ अहसास कराने की कोशिश की थी कि, अगर उसने गोली चलाई तो जवाब में मैं उस पर लाठी चलाने से नहीं चूकूंगा। बस यही तरीका बचा लाया। और फिर मारने वाले से बड़ा बचाने वाला होता है। कहते हुए दीपक दहिया पुलिस महकमे के प्रोटोकॉल की बात कहते हुए ज्यादा बात करने से इनकार कर देते हैं।

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