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पुरा’णों में ब’ताया ग’या है गं’दे क’पड़े पह’नने से घ’र में हो’ती है ये ब’ड़ी.. क’हीं आ’प भी तो न’हीं… जानि’ए इ’ससे जु’ड़ी क’ई बा’तें…

धार्मिक खबर

उज्जै’न. हमा’रे ध’र्म ग्रं’थों में अ’नेक ऐ’सी बा’तें ब’ताई ग’ई हैं जो ह’में ला’इफ मैनेज’मेंट के सू’त्र सिखा’ती हैं। ग’रुड़ पु’राण भी ए’क ऐ’सा ही ग्रं’थ हैं जो ह’में जीव’न से जु’ड़ी अ’नेक गु’प्त बा’तों से अव’गत कर’वाता है, ये बा’तें ह’मारे लि’ए जान’ना ब’हुत ही ज’रूरी है। गरु’ड़ पुरा’ण के नीति’सार में बता’या ग’या है कि कि’स ची’ज से क्या न’ष्ट हो जा’ता है…

. गं’दे क’पड़े पहन’ने से सौ’भाग्य न’ष्ट हो जा’ता है

जो लो’ग ध’न औ’र स’भी सु’ख-सुवि’धाओं से सं’पन्न हैं, फि’र भी गं’दे कप’ड़े पह’नते हैं तो उन’का सौ’भाग्य न’ष्ट हो जा’ता है। गरु’ड़ पुरा’ण में बता’या ग’या है कि ऐ’से लो’गों को म’हालक्ष्मी त्या’ग दे’ती हैं औ’र स’माज में भी सम्मा’न प्रा’प्त न’हीं हो’ता है। सा’फ ए’वं सुगं’धित व’स्त्र धार’ण कर’ने प’र ल’क्ष्मी की विशे’ष कृ’पा ब’नी र’हती है।

2. अभ्या’स के बि’ना वि’द्या न’ष्ट हो जा’ती है

य’दि ह’म वि’द्या का नि’रंतर अभ्या’स न’हीं क’रेंगे तो उ’स ज्ञा’न को भू’ल स’कते हैं। अ’त: ह’म जो भी ची’जें सीख’ते हैं, उ’नका लगा’तार अभ्या’स क’रते रह’ना चा’हिए।

3. संतु’लित औ’र सु’पाच्य भोज’न से रो’गों का ना’श हो’ता है

अधि’कांश बीमा’रियां असंतु’लित खा’न-पा’न की वज’ह से ही हो’ती हैं। ह’में सदै’व सु’पाच्य भो’जन ही ग्रह’ण कर’ना चाहि’ए। ऐ’से भो’जन से पाच’न तं’त्र ठी’क से का’म कर’ता है औ’र भो’जन से पू’र्ण ऊ’र्जा श’रीर को प्रा’प्त हो’ती है। पा’चन तं’त्र स्व’स्थ रह’ता है औ’र इ’स वज’ह से ह’म रो’गों से ब’चे र’हते हैं।

4. चतु’रता पू’र्ण नी’ति से श’त्रु न’ष्ट हो’ता है

शत्रु’ओं से निप’टने के लि’ए चतुर’ता पू’र्ण नी’ति का सहा’रा ले’ना चा’हिए। श’त्रु लगा’तार ह’में नुक’सान पहुं’चाने का प्र’यास कर’ते रह’ते हैं औ’र य’दि ह’में चतु’रता न’हीं दिखा’एंगे तो हा’नि ह’मारी ही हो’ती है। अ’त: जै’सा श’त्रु है, उस’के अनु’सार नी’ति का उप’योग क’रके उ’से न’ष्ट कि’या जा सक’ता है।