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दिवा’ली के कु’छ दि’न प’हले से ही आज’माएं जा’ते है ये उपा’य, ध’न प्रा’प्ति के लि’ए मा’ने जा’ते है अ’चूक…

धार्मिक खबर

अं’धेरी रा’त को रोश’न कर’ने, खुशि’यों औ’र सु’ख-स’मृद्धि का त्यो’हार दिवा’ली का’र्तिक मा’स में कृ’ष्ण प’क्ष की अमा’वस्या प’र मना’या जा’ता है। इ’स सा’ल यह त्योहा’र 14 नवं’बर को म’नाया जा’एगा। मा’ना जा’ता है कि दिवा’ली की रा’त मां महा’लक्ष्मी स्व’यं भ’क्तों के घ’र प’धारती हैं। मां महा’लक्ष्मी की वि’धि-वि’धान के सा’थ पूज’न कि’या जा’ता है। ता’कि वर्ष’भर घ’र में कि’सी भी प्र’कार से ध’न की क’मी न र’हे औ’र मां ल’क्ष्मी का आशी’र्वाद ब’ना र’हे। ज्यो’तिष में ध’न प्रा’प्ति के लि’ए बहु’त से उपा’य बता’ए ग’ए हैं, लेकि’न दि’वाली का दि’न ध’न प्रा’प्ति के बेह’द खा’स मा’ना जा’ता है। लो’ग ध’न वृ’द्धि औ’र ल’क्ष्मी जी की कृ’पा पा’ने के लि’ए सदि’यों से क’ई टो’टके आ’जमातें आ र’हे हैं जो ब’हुत ही अ’चूक मा’ने जा’ते हैं।  तो जा’नते हैं दिवा’ली प’र ध’न प्रा’प्ति के उपा’य…  

दिवा’ली के दि’न मां महा’लक्ष्मी को अ’गर भ’ली प्र’कार से म’ना लि’या जा’ए तो ह’र त’रह की आर्थि’क स’मस्या दू’र हो सक’ती है। अ’गर आ’प भी पै’से की कि’ल्लत से प’रेशान हैं तो इ’स दिवा’ली पू’जा क’रने से सा’थ मां म’हालक्ष्मी के इ’स मं’त्र का जा’प क’म से क’म ए’क मा’ला या’नि 108 बा’र अ’वश्य क’रें। अ’धिक से अ’धिक आ’प जि’तना चा’हे जा’प क’र स’कते हैं। 
”ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं क’मले कम’लालये’प्रसीद प्र’सीद् श्रीं ह्रीं श्रीं ऊं महा’लक्ष्मयै न’म:”

ह’ल्दी को शु’भता औ’र स’मृद्धि का प्र’तीक मा’ना जा’ता है। दि’वाली के दि’न मां ल’क्ष्मी की पू’जा में कु’छ ह’ल्दी की गां’ठे अ’वश्य र’खें। पू’जा सं’पन्न हो’ने के बा’द उ’न गां’ठों को कि’सी क’पड़े में लपे’टकर ध’न स्था’न प’र र’ख दें। इ’ससे घ’र में बर’कत आए’गी। 

शनि’देव की व’क्र दृ’ष्टि के का’रण भी व्य’क्ति को आ’र्थिक परे’शानियों का सा’मना कर’ना पड़’ता है। अ’गर आ’प भी इ’सी का’रण परे’शान हैं तो दि’वाली का स’मय आ’पके लि’ए बहु’त उ’त्तम रहे’गा। अमा’वस्या ति’थि को दि’वाली का त्योहा’र मना’या जा’ता है इ’सलिए अग’ले दि’न सु’बह सूर्यो’दय से प’हले उठ’कर स्ना’नादि कर’ने के पश्चा’त पीप’ल के वृ’क्ष में ज’ल अर्पि’त क’रें औ’र दे’र रा’त्रि के स’मय दी’पक भी अ’वश्य प्रज्वलि’त क’रें। लेकि’न दी’पक ज’लाने के बा’द चुप’चाप बि’ना पी’छे मु’ड़े वा’पस आ जा’एं। इ’ससे आप’की श’नि सं’बंधित स’भी परेशा’नियों का अं’त हो जाए’गा।  

य’ह टोट’का या उ’पाय ह’र कि’सी का मालू’म हो’ता है क्यों’कि दीवा’ली के दि’न ल’क्ष्मी जी की कृ’पा पा’ने के लि’ए य’ह टोट’का ब’हुत पह’ले से आज’माया जा’ता है। दि’वाली के दि’न ए’क झा’ड़ी ख’रीद क’र ला’एं उ’ससे पू’रे घ’र की स’फाई क’रें औ’र फि’र उ’से क’हीं प’र छिपा’कर र’ख दें। मा’न्यता है कि इ’स उ’पाय से पू’रे व’र्ष घ’र में ध’न की क’मी न’हीं हो’ती है। मां ल’क्ष्मी की कृ’पा ब’नी रह’ती है। क्यों’कि झा’ड़ू को ल’क्ष्मी का प्र’तीक ही मा’ना जा’ता है। 

दिवा’ली के दि’न मां म’हालक्ष्मी औ’र गणे’श जी का पूज’न तो कि’या ही जा’ता है। लेकि’न ध्या’न र’खें कि इन’के सा’थ ही घ’र के कुल’देवी-देव’ता का पू’जन भी पू’रे वि’धि-विधा’न के सा’थ कर’ना चा’हिए। कौ’ड़ियां मां महा’लक्ष्मी की प्रि’य हैं इस’लिए पू’जा में पी’ले रं’ग की कौ’ड़िया रख’ना न भू’लें। पू’जा के बा’द इ’न कौ’ड़ियों को कि’सी ला’ल या पी’ले रं’ग के क’पड़े में बां’धकर तिजो’री में र’ख दें। मा’ना जा’ता है कि ध’न प्रा’प्ति के लि’ए य’ह ब’हुत ही अचू’क उपा’य है। अग’र आप’का ध’न क’हीं प’र अट’का हु’आ है तो व’ह मिल’ने के भी शी’घ्र यो’ग ब’नते हैं।