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दि’वाली की रा’त घ’र में इ’स जग’ह र’खें दी’पक, आएं’गी मां ल’क्ष्मी, हों’गी ध’न की व’र्षा….

धार्मिक खबर

दीपा’वली प’र अ’कसर चा’रों ओ’र दी’पक ज’लाए जा’ते हैं। घ’र के ह’र को’ने में दीप’क ज’लाए जा’ते हैं। दीपा’वली प’र क’हां क’हां दीप’क ज’लाएं जा’ते हैं आ’ओ जा’नते हैं इ’स संबं’ध में रोच’क जा’नकारी।

वै’से धनतेर’स प’र अ’काल मृ’त्यु से बच’ने के लि’ए य’म के ना’म का ए’क दी’पक जला’या जा’ता है। धनते’रस की शा’म को मु’ख्य द्वा’र प’र 13 औ’र घ’र के अं’दर भी 13 दी’प ज’लाने हो’ते हैं। लेकि’न य’म के ना’म का दी’पक प’रिवार के स’भी स’दस्यों के घ’र आ’ने औ’र खा’ने-पी’ने के बा’द सो’ते स’मय जला’या जा’ता है। इ’स दी’प को ज’लाने के लि’ए पुरा’ने दीप’क का उप’योग कि’या जा’ता है जि’समें स’रसों का ते’ल डा’ला जा’ता है। य’ह दी’पक घ’र से बा’हर द’क्षिण की ओ’र मु’ख क’र ना’ली या कू’ड़े के ढे’र के पा’स र’ख दि’या जा’ता है। इस’के बा’द ज’ल च’ढ़ा क’र दीप’दान कि’या जा’ता है।

क’ई घ’रों में इ’स दि’न रा’त को घ’र का सब’से बु’जुर्ग स’दस्य ए’क दी’या ज’ला क’र पू’रे घ’र में घुमा’ता है औ’र फि’र उ’से लेक’र घ’र से बा’हर क’हीं दू’र र’ख क’र आ’ता है। घ’र के अ’न्य स’दस्य अं’दर रह’ते हैं औ’र इ’स दी’ये को न’हीं देख’ते हैं। य’ह दी’या य’म का दी’या कहला’ता है। मा’ना जा’ता है कि पू’रे घ’र में इ’से घू’मा क’र बा’हर ले जा’ने से स’भी बुरा’इयां औ’र क’थित बु’री श’क्तियां घ’र से बाह’र च’ली जा’ती हैं।

हा’लांकि ह’म य’हां बता’ने जा र’हे हैं कि क’ई घ’रों में परंप’रा से दी’पावली प’र क’हां-क’हां दी’पक ज’लाएं जा’ते हैं-

1. दिपा’वली के दि’न ल’क्ष्‍मी की पू’जा क’रने के लि’ए ए’क दी’पक ज’लाया जा’ता है। व’ह दी’पक पी’तल या स्टी’ल का हो’ता है।

2. कह’ते हैं कि दीपा’वली की रा’त को देवा’लय में गा’य के दू’ध का शु’द्ध घी का दी’पक जला’ना चा’हिए। इस’से तु’रंत ही क’र्ज से छुट’कारा मिल’ता है औ’र आ’र्थिक तं’गी दू’र हो जा’ती है।

3. दीपा’वली की रा’त को तीस’रा दी’या तुल’सी के पा’स ज’लाया जा’ता है। आ’पके घ’र में तुल’सी न’हीं है तो औ’र कि’सी पौ’धे के पा’स य’ह दी’या र’ख सक’ते हैं।

4. चौ’था दी’पक दर’वाजे के बाह’र दे’हरी के आस’पास र’खा जा’ता है या ब’नाई ग’ई रांगो’ली के बी’च में रख’ते हैं।

5. पांच’वां दी’या पी’पल के पे’ड़ के नी’चे रख’कर आ’ते हैं।

6. छ’ठा दीप’क पा’स के कि’सी मं’दिर में रख’ना ज’रूरी हो’ता है।

7.सा’तवां दीप’क कच’रा रख’ने वा’ले स्था’न प’र रख’ते हैं।

8. आठ’वां बा’थरूम के को’ने में रख’ते हैं।

9. नौ’वां दीप’क मुंडे’र प’र या आप’के घ’र में गै’लरी हो तो व’हां र’खते हैं।

10. दस’वां घ’र की दि’वारों प’र की मुंडे’र प’र या बॉउं’ड्रीवाल प’र र’खते हैं।

11.ग्यार’हां दी’पक खिड़’की में र’खते हैं।

12. बार’हवां दी’पक छ’त प’र रख’ते हैं।

13.तेरह’वां दीप’क कि’सी चौ’राहे प’र रख’कर आ’ते हैं।

14. चौद’हवां दी’पक दीपाव’ली प’र कु’ल दे’वी या देव’ता, य’म औ’र पित’रों के लि’ए भी जला’या जा’ता है।

15. पंद्रह’वां दी’पक गौशा’ला में र’खते हैं।