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कं’डोम को लेकर डॉक्ट’र्स का बड़ा खुला’सा: गिनाए ये 7 अनो’खे फायदे, जानिए…

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आ’ज कॉन्ड’म के उपयो’ग को ले’कर बा’त क’रना जित’ना सह’ज है, कु’छ सा’ल पह’ले त’क ऐ’सा न’हीं था। उ’स व’क्त मा’ना जा’ता था कि कॉन्ड’म का उ’पयोग सि’र्फ व’ही लो’ग कर’ते हैं, जो प्रोस्टी’ट्यूट्स के सा’थ यौ’न संबं’ध बना’ते हैं। खै’र, व’क्त के सा’थ सो’च में भी बद’लाव आ’या औ’र कॉन्ड’म के टेक्सच’र त’था फ्ले’वर की दु’निया भी 360 डि’ग्री ब’दल ग’ई।

लेकि’न आ’ज भी क’ई ऐ’से कार’ण हैं, जि’नके चल’ते ब’ड़ी सं’ख्या में पु’रुष कॉन्ड’म का उप’योग कर’ना पसं’द न’हीं कर’ते हैं। ऐ’से ही कु’छ कार’ण य’हां ब’ताए जा र’हे हैं। हा’लांकि हे’ल्थ डॉक्ट’र्स इन’में से ज्यादा’तर कार’णों को सि’र्फ साय’कॉलजिकल मा’नते हैं। या’नी ये सि’र्फ सो’च प’र आधा’रित हैं…

-मै’क्स हॉस्पिट’ल (पट’पड़गंज) दि’ल्ली के सी’नियर साय’काइट्रिस्ट डॉ’क्टर रा’जेश गु’प्ता का कह’ना है कि इंटि’मेट रिले’शनशिप से जु’ड़ी सम’स्याओं के सा’थ हमा’रे पा’स आनेवा’ले पेशं’ट्स में ए’क व’र्ग ऐ’से मरी’जों का भी हो’ता है, जो अप’नी असं’तुष्ट से:क्स ला’इफ में कॉन्ड’म को भी ए’क का’रण मा’नते हैं।

पुरु’ष क्यों प’संद न’हीं क’रते कॉन्ड’म का उपयो’ग?

इन’में से ज्यादा’तर मरी’जों का कह’ना हो’ता है कि हा’ई मू’ड के मो’मेंट पर कॉन्ड’म का उपयो’ग कर’ने में ल’ग जा’ने के का’रण उन’के प्लेइं’ग मू’ड का फ्लो टूट’ता है। जब’कि कु’छ पेशं’ट्स को लग’ता है कि कॉन्ड’म के उ’पयोग के का’रण वे अप’ने पा’र्टनर के सा’थ उ’स इंटि’मेसी का अनु’भव न’हीं क’र पा’ते हैं, जि’से वे बि’ना कॉन्ड’म का उपयो’ग कि’ए अनु:भव कर’ते हैं।