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द्रौपदी के इस श्राप के कारण, कुत्ते करते है “खु’ले में स’ह’वा’स”

दोस्तों आज मैं आपके सामने एक बहुत ही रोचक कहानी लेकर आया हूँ. यह लोक कथा बहुत ही प्रचलित है परंतु इसका प्रमाण किसी भी ग्रंथ में नहीं मिलता है. आपने देखा होगा की कुत्ते हमेशा खुले में ही स’ह’वा’स करते हैं लेकिन इसके पीछे भी एक कहानी है. आइये जानते हैं इस कहानी में आखिर ऐसा क्या हुआ जिस वजह से द्रोपदी ने कुत्ता को ये शाप दिया की वो खुलें में स’ह’वा’स करे.

आपको बता दें ये कहानी शुरुवात हुई थी महाभारत से, ऐसा माना जाता हैं, की जब अर्जुन विवाह करके द्रोपति को घर लाएं थे तो माता कुंती अपने किसी काम में व्यस्त थी. व्यस्त होने की वजह से बिना देखे अनजाने में सभी भाइयों को यह आदेश दे दिया था कि सभी भाई मिलकर बराबर-बराबर उसका उपयोग करो. माता कुंती की बात का मान रखने के लिए सभी भाइयों ने द्रौपदी से विवाह किया था. जैसा की आप सभी जानते हैं द्रौपदी पांच पांडवों की अकेली बीवी थी, तो 5 पांडव भाइयों ने एक साथ ही द्रौपदी से विवाह रचाया था. इस विवाह के बाद पांचों पांडव भाइयों ने निर्धारित किया था की द्रौपदी प्रत्येक वर्ष एक पांडव के पास रहेगी और उसी के साथ समय व्यतीत करेगी. इनमे ये भी निर्धारित हुआ की जब द्रौपदी एक पांडव के कक्ष में हो, तो उस समय कोई दूसरा पांडव भाई उस कक्ष में प्रवेश नहीं करेगा.

कहते हैं कि जब भी कोई एक पांडव द्रौपदी के कक्ष में जाया करता था तो वह अपनी पादुकाएं द्वार पर उतार दिया करता था. दरअसल सभी पांडव भाइयों ने आपस में एक फैसला किया था की, द्रौपदी जिस पांडव के साथ कक्ष में होगी तो वो पांडव कक्ष के बाहर अपनी पादुकाएं छोड़ देगा. जिससे दूसरे पांडवों को पता चल जाये की कक्ष में दूसरा भाई है और उस समय उस कक्ष में प्रवेश नहीं करना है. लेकिन एक बार जब अर्जुन द्रौपदी के पास कक्ष में आया तो उसने भी अपनी पादुकाएं कक्ष के बाहर छोड़ दी ताकि दूसरे भाइयों को पता चल सके की कक्ष में प्रवेश नहीं करना है.

एक बार की बात हैं, जब कक्ष के अंदर द्रौपदी और अर्जुन प्रेम प्रसंग में लीन थे. तभी वहां पर एक कुत्ता आया और खेल खेल में उस कुत्ते ने अर्जुन की पादुकाएं उठाकर पास के जंगल में ले गया और उनके साथ खेलने लगा.
इसी दौरान भीम द्रौपदी से मिलने कक्ष में आया और उसने देखा की कक्ष के बाहर कोई पादुकाएं नहीं हैं तो उसे लगा की अंदर कोई नहीं है तो भीम ने कक्ष में प्रवेश कर लिया. कक्ष में अर्जुन और द्रौपदी प्रेमप्रसंग में लीन थे और भीम के अचानक अंदर आ जाने से द्रौपदी को काफी शर्मिंदगी महसूस हुई, और बहुत ही क्रोधित होते हुए उसने भीम से कहा कि उसने कक्ष में प्रवेश कैसे किया जब अर्जुन ने अपनी पादुका प्रवेश द्वार के बाहर उतारे थे. इस घटना से दोनों भाइयों में भी तनाव हो गया और अर्जुन ने भीम को गुस्से में कहा की जब मैं कक्ष के बाहर अपनी पादुकाएं छोड़कर आया था तो तुमने अंदर प्रवेश क्यों किया?

भीम बोला की बाहर तो कोई पादुकाएं नहीं रखी हैं. तब दोनों भाइयों ने बाहर आकर देखा तो सच में अर्जुन की पादुकाएं वहां से गायब थी. पादुकाएं कौन ले गया इसकी खोज में दोनों भाई पादुकाएं ढूंढते ढूंढते पास के जंगल में गए जहाँ उन्होंने देखा की एक कुत्ता अर्जुन की पादुकाओं के साथ खेल रहा था. जब द्रौपदी को पता चला की कुत्ता के द्वारा चरण पादुकाएं उठाकर ले जाया गया हैं तो द्रोपदी इस बात से बहुत ही लज्जित महसूस कर रही थी तो उसने क्रोध में आकर कुत्ते को यह श्राप दे दिया कि जैसे आज मुझे किसी ने सहवास करते देखा है उसी तरह तुम्हें सारी दुनिया सहवास करते देखेगी. इसी श्राप के कारण माना जाता है की कुत्ते हमेशा खुले में सहवास करते हैं और सहवास करते समय उन्हें कोई लाज-शर्म नहीं होती.

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