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सुबह-सुबह बढती महंगाई के बीच सरकारी कर्मचारियो को जोर का झ’टका, मोदी सरकार ने…

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महंगे पेट्रोल-डीजल, LPG की बढ़ती कीमतों और CNG, PNG की महंगाई के बाद अब एक और झटका झेलने के लिए तैयार हो जाइए. वित्त वर्ष 20-21 में EPF के ब्याज में एक बार फिर कटोती होने वाली है. अगर ऐसा हुआ तो 6 करोड़ से ज्यादा सैलरीड क्लास के लिए एक बहुत बड़ा झ’टका होगा. अबतक EPF सब्स’क्राइ’बर्स जो पिछले साल तक ब्याज नहीं मिलने को लेकर प’रेशान थे, अब उन पर दोहरी मा’र पड़ने वाली है.

EPF पर मिलने वाला ब्याज घटेगा!
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक को”रोना सं’कटकाल में लोगों ने काफी बड़ी संख्या में EPF निकासी की है, इस दौ’रान अंशदान में भी कमी आई है. जिसके चलते दरों में क’टौती का फैसला कर सकता है. नई दरों पर फै’सला करने के लिए कल 4 मार्च को EPFO सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की बैठक होगी. ऐसे मा’हौल में दरों में कटौ’ती तय मानी जा रही है.

4 मार्च को होगा ब्याज दरों पर फैसला
वर्ष 2020 में EPFO की कमाई पर बुरा असर पड़ा है. PTI से बात करते हुए EPFO के ट्रस्टी के ई रघुनाथन ने बताया कि उन्हें बताया गया है कि 4 मार्च को सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्र्स्टीज की बैठक श्रीनगर में होगी. उनको मिली ई-मेल में ब्याज दरों को लेकर किसी तरह की कोई जानकारी नहीं दी गई है.

आपको बता दें कि सरकार ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 8.5 परसेंट ब्याज देना का ऐलान किया था, सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज ने पहले कहा था कि 31 मार्च को खत्म वित्त वर्ष में दो किस्तों में 8.5 परसेंट ब्याज का भुगतान किया जाएगा. यानी 8.15 परसेंट इन्वेस्टमेंट से और 0.35 परसेंट ब्याज का भुगतान इक्विट से किया जाएगा.

EPF पर 7 साल में सबसे कम ब्याज
वित्त वर्ष 2020 में EPF पर 8.5 परसेंट का ब्याज मिला, जो कि 7 सालों में सबसे कम ब्याज है. इसके पहले वित्त वर्ष 2013 में EPF पर ब्याज दरें 8.5 परसेंट थीं. पिछले साल मार्च में EPFO ने ब्याज को रिवाइज किया था. इसके पहले वित्त वर्ष 2019 में EPF पर 8.65 परसेंट ब्याज मिलता था. EPFO ने वित्त वर्ष 2018 में 8.55 परसेंट ब्याज दिया था, जो कि इसके पहले वित्त वर्ष 2016 में ये 8.8 परसेंट था. इसके पहले वित्त वर्ष 2014 में ये 8.75 परसेंट था.

आपको बता दें कि देश भर में EPF के 6 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं. वित्त वर्ष 2020 में भी इन करोड़ों लोगों को KYC में हुई ग’ड़ब’ड़ी की वजह से ब्याज मिलने में देरी हुई थी. उसके बाद अब अगर ब्याज दरों में कटौती होती है तो ये बहुत बड़ा झ’टका होगा.