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खत’रनाक जं’गल: इ’स जंग’ल में ग’ए तो आ’पका मन भी सुसा’इड करने का हो जा’एगा, देखि’ए कैसे लोग इस जंग’ल में जाते ही करते है सुसा’इड, देखें तस्वी’रें…

हिंदी खबर

संपू’र्ण ध’रती र’हस्य, रोमां’च औ’र अजू’बों से भ’री हु’ई है। क’हीं प’र प्र’कृति के खूबसू’रत न’जारें हैं तो क’हीं प’र प्राकृ’ति जो’खिम भ’रे स्था’न है, जै’से ज्वा’लामुखी, ऊं’चे व भया’नक पहा’ड़, खतरना’क समु’द्री क्षे‍’त्र आदि। लेकिन हम किसी प्राकृ’तिक अजू’बे की बात नहीं कर रहे हैं। हम एक ऐसे जं’गल की बात कर रहे हैं जिसे आ’त्मह’त्या करने के लिए दुनिया की सबसे खतर’नाक जगह माना जाता है। दरअस’ल यह एक जंग’ल है। आओ जानते हैं कि क्या है पू’रा माम’ला।

ओकि’घारा सु’साइट फा’रेस्ट आ’त्मह’त्या करने के लिए यह दु’निया की सबसे कुख्या’त जगह है। यहां 2002 में ही 78 लो’गों ने आ’त्मह’त्या की थी। आ’खिर क्यों? क्या इस’लिए कि एक प्रा’चीन किव’दंती के अ’नुसार एक बार प्रा’चीन जापान में जब कुछ लोग अपना भ’रण-पो’षण करने में अ’समर्थ थे तो उन्हें ओकि’घारा के इस जंग’ल में छो’ड़ दिया गया था, जहां पर उन सब’की भूख से मौ’त हो गई थी। ऐसा माना जाता है कि वही भू’त इस जं’गल में आज शि’कार करते हैं। कहा तो यह भी जाता है कि जिन लोगों ने यहां सुसा’इड की हैं, उनकी आत्मा’ओं का भी यहां वा’स है।

जा’पान के ज्योति’षियों का वि’श्वास है कि जंग’लों में आ’त्मह’त्या के पीछे पे’ड़ों पर रहने वा’ली वि’चित्र श’क्तियों का हाथ है, जो इस तरह की घट’नाओं को अं’जाम देती रहती हैं। क’ई लोग, जो इस जं’गल में एक बार प्र’वेश कर जाते हैं, उन्हें ये श’क्तियां बा’हर नि’कलने नहीं देती हैं और वे उनके दि’माग पर का’बू कर लेती हैं।