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इसलिए लड़’कियों के पेट में नहीं पच’ती कोई बात, व’जह जानकर हि’ल जाएगा दिमाग…

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यह आ’प अ’च्छी तर’ह जा’नते हैं कि ज’ब दो महि’लाएं आ’पस में मिल’ती है तो क’ई रा’ज खु’ल जा’ते है। लेकि’न कु’छ महि’लाएं कु’छ ऐ’सी बा’तें क’ह जा’ती है जो उ’न्हें न’हीं कह’नी चा’हिए। इस’से घ’र में कले’श ब’ढ़ जा’ता है। महि’लाओं के पे’ट में को’ई बा’त न’हीं पच’ती है। वो क’हीं न क’हीं बा’त को उग’ल ही दे’ती हैं। क’भी आप’ने सो’चा है कि ऐ’सा क्‍यों हो’ता है। सब’से ज्‍या’दा ख’तरा तो त’ब हो’ता है ज’ब आ’प उ’न्‍हे म’ना क’र दें कि कि’सी को भी म’त बता’ना, त’ब वो सब’से पह’ले ब’ता दे’ती हैं।

महि’लाएं क्यों न’हीं छु’पा पा’ती है बा’तें

पुरा’नी कथा’ओं और महा’भारत में व’र्णन के अनु’सार कुं’ती को प’ता था कि क’र्ण उन’का पु’त्र है ले’किन उन्‍हो’ने य’ह स’त्‍य स’भी से छु’पाएं र’खा। ज’ब य’ह बा’त उन’के पां’डव पु’त्रों को प’ता च’ली तो उन’के ज्‍ये’ष्‍ठ पु’त्र युधि’ष्ठिर ने उन्‍हे शा’प दे दि’या, “आ’पने य’ह बा’त छुपा’कर र’खी, इसलि’ए मैं आप’को शा’प दे’ता हूँ कि आ’ज के बा’द आ’प क्‍या दुनि’या की को’ई भी स्‍त्री अ’पने पे’ट में बा’त पचा’कर न’हीं र’ख पाए’गी। व’ह स’त्‍य को उग’ल ही दे’गी।”

महि’लाओं में ब’च्‍चों की त’रह जि’ज्ञासा हो’ती है जो क’भी शां’त न’हीं हो’ती। उ’नसे को’ई बा’त ह’ज़म न’हीं हो’ती है औ’र व’ह ह’र बा’त को जा’नने की इ’च्‍छा भी रख’ती हैं।