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दिवाली पर घर में श्रीगणेश की प्रतिमा स्थापना से पहले जानें उनकी सूंड की कौन सी दिशा देती है लाभ..

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दीपावली पर स्थापना के लिए अगर श्री गणेश की प्रतिमा लाने जा रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है. क्या आपने कभी गौर किया है कि भगवान गणेश की मूर्तियों में उनकी सूंड दाईं या कुछ में बाईं ओर होती है. गणेशजी को वक्रतुंड भी कहा जाता है. वक्र यानी मुड़ी हुई और तुंड यानी सूंड आखिर किस तरफ सूंड वाले श्री गणेश पूजनीय हैं आइए जानते हैं..

गणेशजी सभी देवताओं में प्रथम पूज्य हैं. उन्हें ज्ञान और बुद्धि का देवता माना जाता है. ये ऐसे देवता हैं जो जीवन को शुभ-लाभ की दिशा देते हैं. 

दाईं दिशा में सूंड के मायने
दाईं की ओर सूंड वाले गणेशजी को ह’ठी स्वभाव का माना जाता है. इनकी प्रतिमाओं को घरों और ऑफिस में स्थापित नहीं किया जाता है. इन्हें मंदिरों में स्थापित की जाती है. आमतौर पर दाएं हाथ की सूंड वाले गणेशजी को तंत्र विधि से पूजा जाता है. साथ ही दक्षिण दिशा में य’मलो’क है, जहां पा’प-पुण्य का हिसाब रखा जाता है. इसलिए इसे अ’प्रि’य माना जाता है. इनकी पूजा-पाठ आसा’न नहीं है. ऐसे गणे’शजी की पूजा में किसी भी प्रकार की गलती नहीं होनी चाहिए.

बाएं हाथ की ओर सूंड वाली मूर्ति के लाभ
घर ऑफिस में सिंहासन पर बैठे हुए गणेशजी की बाएं हाथ की ओर सूंड वाली प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए. इनकी पूजा से घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है. इससे शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली प्राप्त होती है. साथ ही घर के मुख्य द्वार पर गणेशजी की मूर्ति या तस्वीर लगाना शुभ होता है. यहां बायीं ओर घूमी  हुई सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करना चाहिए. बायीं ओर घूमी हुई सूंड वाले गणेशजी वि’घ्न’वि’ना’श’क कहलाते हैं. इससे न’का’रात्मक’ता,  लाएं, वि’प’दा’एं या ने’गेटि’व ए’न’र्जी दूर होती हैं