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Govardhan Puja 2020: गोवर्धन पूजा आज, इस विधि से बनाएं अन्नकूट, लगाएं 56 भोग, आप पर बरसेगी कृपा

धार्मिक समाचार

आज गोवर्धन पूजा है। इस पूजा को अन्न’कूट पूजा भी कहते हैं। हिन्दू आ’स्था का यह त्यो’हार हर साल का’र्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है। इस दिन गौ पूजन का वि’शेष महत्व होता है। मान्य’ता है कि ऐसा करने से घर में सुख समृ’द्धि आती है। इस दिन 56 भोग लगाने की परं’परा है। आइए जानते हैं यह परंपरा कैसे शुरू हुई और इसका पौरा’णिक महत्व क्या है। 

गोवर्धन पूजा 2020

धार्मिक महत्व कहा जाता है कि भग’वान श्रीकृष्ण ने इंद्र का अभि’मान चूर करने के लिए गोव’र्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा’कर संपूर्ण गोकुल वासि’यों की इंद्र के कोप से रक्षा की थी। इन्द्र के अभि’मान को चूर करने के बाद भगवान श्रीकृ’ष्ण ने कहा था कि कार्तिक शुक्ल प्रति’पदा के दिन 56 भोग बना’कर गोवर्धन पर्वत की पूजा करें। गोवर्धन पर्वत से गोकुल वा’सियों को पशु’ओं के लिए चारा मिलता है। गोवर्धन पर्वत बादलों को रोक’कर वर्षा करवा’ता है जिससे कृषि उन्नत होती है। इसलिए गोव’र्धन की पूजा की जानी चा’हिए।

गोवर्धन पूजा करतीं महिलाएं

पूजा-विधि और सामग्री
गोव’र्धन पूजा के दिन अन्न’कूट बनाकर गोवर्धन पर्वत और भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। इसके पीछे एक मान्य’ता यह भी है कि इन्द्र के कोप से बचने के लिए गो’कुल वासियों ने जब गोव’र्धन पर्वत के नीचे शरण ली तब गो’कुल वासियों ने 56 भोग बनाकर श्रीकृष्ण को भोग लगाया था। इससे प्रस’न्न होकर श्री कृष्ण ने गोकु’ल वासियों को आशी’र्वाद दिया कि वह गोकुल वा’सियों की रक्षा करेंगे। इन्द्र से भय’भीत होने की कोई जरू’रत नहीं है।


 अन्न’कूट बनाने के लिए कई तरह की सब्जि’यां, दूध और मावे से बने मि’ष्ठान और चावल का प्रयोग किया जाता है। अन्न’कूट में ऋतु संबंधी अन्न, फल, सब्जियां का प्रसाद बनाया जाता है। गोव’र्धन पूजा में भगवान कृष्ण के साथ धरती पर अन्न उप’जाने में मदद करने वाले सभी देवों जैसे, इन्द्र, अग्नि, वृक्ष और जल देवता की भी आरा’धना की जाती है। गोवर्धन पूजा में इन्द्र की पूजा इसलिए होती है क्योंकि अभि’मान चूर होने के बाद इन्द्र ने श्रीकृ’ष्ण से क्षमा मांगी और आशी’र्वाद स्वरूप गोव’र्धन पूजा में इन्द्र की पूजा को भी मा’न्यता दे दी।

गोवर्धन पूजा की कथा

 ऐसे शुरू हुई 56 भोग की परंपरा ऐसी मा’न्यता है इंद्र के प्रकोप से ब्रजवा’सियों को बचाने के लिए और उनका घमंड तोड़ने के लिए भग’वान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था। इंद्र ने अपनी ताकत का इस्ते’माल करते हुए लगा’तार 7 दिनों तक ब्रज में मूसला’धार बारिश कराते रहे। तब भग’वान कृष्ण ने लगा’तार सात दिनों तक भूखे-प्यासे अपनी उंगली पर गोर्वधन पर्वत को उठाएं रखना पड़ा था। इसके बाद उन्हें सात दिनों और आठ पहर के हिसाब से 56 व्यं’जन खि’लाए गए थे। माना जाता है तभी से ये 56 भोग की पर’म्परा की  शुरू’आत हुई।

गोवर्धन पूजा 2020

गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा मुहूर्त :15:18 से 17:27 तक
अवधि : 2 घंटे 8 मिनट