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जानिये शराब के ठेकों से कितनी होगी सरकार की कमाई, जिससे बेहतर हो सकेगी राज्यों की इकोनॉमि

लॉकडाउन के तीसरे चरण में आज से श’राब की दुकानें खुल गई. श’राब राज्यों के लिए राजस्व का सबसे बड़ा श्रोत है. इसलिए कई राज्य मांग कर रहे थे कि लॉकडाउन में श’राब दुकानों और ठेकों को छूट दी जाए. आखिरकार आज से श’राब दुकानें खुल ही गईं. दुकाने खुलते ही सुबह से जो नज़ारा देश के अलग अलग शहरों में देखने को मिला वो चौंकाने वाला था. लोग सुबह से ही दुकानों के बाहर एक -एक किलोमीटर लम्बी लाइन में लगे दिखे. आज हम आपको बतायेंगे शराब के ठेकों से सरकार को कितनी कमाई हो सकती हैं.

असल में राज्यों की कमाई के मुख्य स्रोत हैं- राज्य जीएसटी, भू-राजस्व, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट या सेल्स टैक्स, शराब पर लगने वाला एक्साइज और गाड़ियों आदि पर लगने वाले कई अन्य टैक्स. शराब पर लगने वाला एक्साइज टैक्स यानी आबकारी शुल्क राज्यों के राजस्व में एक बड़ा योगदान करता है. शराब और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी से बाहर रखा गया है. इसलिए राज्य इन पर भारी टैक्स लगाकर अपना राजस्व बढ़ाते हैं. हाल में राजस्थान सरकार ने शराब पर एक्साइज टैक्स 10 फीसदी बढ़ा दिया. राज्य में अब देश में निर्मित विदेशी शराब (IMFL) पर टैक्स 35 से 45 फीसदी तक हो गया है. इसी तरह बीयर पर भी टैक्स बढ़ाकर 45 फीसदी कर दिया गया है. यानी 100 रुपये की बीयर में 45 रुपया तो ग्राहक सरकार को टैक्स ही दे देता है.

शराब की बिक्री से वित्त वर्ष 2019-20 में महाराष्ट्र ने 24,000 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश ने 26,000 करोड़, तेलंगाना ने 21,500 करोड़, कर्नाटक ने 20,948 करोड़, पश्चिम बंगाल ने 11,874 करोड़ रुपये, राजस्थान ने 7,800 करोड़ रुपये और पंजाब ने 5,600 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल किया था. दिल्ली ने इस दौरान करीब 5,500 करोड़ रुपये का आबकारी शुल्क हासिल किया था. राज्य के कुल राजस्व का यह करीब 14 फीसदी है. बिहार और गुजरात में शराब बिक्री पर प्रतिबंध लगा हुआ है. 

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