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हर तीसरी महि’ला को होती है ये बी’मारी, लेकिन फिर भी रहती हैं लाप’रवाह😱

डेली न्यूज़

भारत में महि’लाओं की स्वा’स्थ्य की स्थिति अच्छी नही है। ग्रामी’ण ही नहीं बल्कि शह’री क्षेत्रों में भी महि’लाएं बहुत सारी मासि’क धर्म से जुड़ी परेशा’नियों से जूझ’ती रहती हैं। लेकिन अपने स्वा’स्थ्य को लेकर लापर’वाही उनके लिए भारी पड़ जाती है। शरीर में होने वाले गंभी’र लक्ष’णों को अन’देखा करने के कारण उन्हें कई सारी तकली’फों का साम’ना करना पड़ता है। जिसमें से एक सम’स्या ये भी है। 

every third women of india suffering of pelvic congestion syndrome

 ऐसी ही सम’स्या जो भारत की लग’भग हर तीसरी महि’ला में देखने को मिलती है, वो है पेट के नि’चले हिस्से में दर्द। ये दर्द पेट के नि’चले हिस्से से लेकर कूल्हे और जांघों तक होता है। ले’कन वो इस दर्द को सामान्य पीरि’यड का दर्द समझ कर दरकि’नार करती हैं। लेकिन ये दर्द गंभीर बी’मारी पेल्विक कंजे’शन सिं’ड्रोम के लक्षण हो सकते हैं। जिसका सही इ’लाज बहुत जरूरी है। 

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इस तरह के दर्द को महि’लाएं पीरि’यड का सामान्य दर्द समझ कर नजर अंदाज करती हैं। जो कि ठीक नही है क्योंकि लगा’तार छह महीने से ज्या’दा अगर ये दर्द शरीर में बना रहे तो ये पेल्वि’क कंजे’शन सिंड्रोम यानी PCS का रूप ले लेता है। जि’समें खड़े होने पर भी बेहद तेज दर्द होता है। इस बी’मारी में जांघ, नितंब और योनि क्षेत्र की नसों के सा’मान्य से ज्यादा खिंच जाने की वजह से असह’नीय दर्द होना शुरू हो जाता है। ज्या’दातर 20 से 45 आयु वर्ग की महि’लाएं इसकी शिकार होती हैं जो महि’लाएं हाल ही में मां बनती हैं, युवा होती हैं,या कई बार मां बन चुकी होती हैं,  उन्हें यह सम’स्या अधिक होती है क्यों’कि इसी उम्र में वह संके’तों को नजर अंदा’ज कर देती हैं, नतीजा सम’स्या बढ़ जाती है। इस बीमा’री का का’रण होता है हार्मो’नल और शरीर की बना’वट में गड़बड़ी। 

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गर्भा’वस्था के दौरान अधि’कतर महि’लाओं में होने वाले हार्मोंस में बद’लाव और वजन बढ़ने के कारण कूल्हे के आस’पास के हिस्सों में बद’लाव आता है। गर्भा’शय की नसों पर दबाव बढ़ने के कारण ये कमजोर होकर फैल जाती हैं। जिस’की वजह से वॉल्व बंद नही होते और रक्त वापस शि’राओं में आ जाता है। जिसकी वजह से पे’ल्विक एरिया में खून के दबाव के कारण दर्द बढ़ जाता है। इसके इला’ज के लिए किसी तरह के ऑपरे’शन की जरूरत नहीं होती है। बस खराब नसों को बंद कर दिया जाता है। जिससे कि उनमें रक्त जमा न हो। ये किसी भी तरह की सर्जरी से आसान प्रक्रि’या है और इसके इलाज के बाद ये पूरी तरह से ठीक हो जाता है। लेकिन महि’लाओं को इस बारे में पूरी जान’कारी नहीं होती और वो इस कष्ट को सहती रहती हैं।