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जानें क्यों मा’रा जाता हैं जल’ती हुई ला’श के सिर पर डंडा

क्या आप लोग जानते हैं कि जलती हुई लाश के सिर पर डंडा क्यों मारा जाता हैं? दरअसल हमारे हिन्दू धर्म में ये रीति-रिवाज सदियों से चले आ रहे हैं. हिन्दू धर्म के अनुसार इंसान कि अंतिम क्रिया एक महतवपूर्ण क्रिया हैं. आप में शायद काफी लोगों को इस बारे में नहीं पता होगा. तो आयिए आज हम आपको इससे जुड़ी सारी बातों के बारे में बताते हैं.

समय के साथ-साथ काफी बदलाव हुए हैं . जैसे पहले महिलाओं को श-म-शा-न घाट में जाने नहीं दिया जाता था. लेकिन आज के वक़्त में कई जगहों पर महिलाएं भी वंहा जाने लग गयी हैं.

  1. जलती हुई लाश के सर पर डंडा

अंतिम संस्कार की एक प्रथा के दौरान मरने वाले के बेटे या भाई को बॉडी के सिर पर डंडे से मारने के लिए कहा जाता हैं. दरअसल ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि मरने वाले के पास अगर कोई तंत्र विद्या है, तो कोई दूसरा तांत्रिक उसकी आत्मा को अपने वश में ना कर सकें।

ये एक ऐसा रिवाज हैं , इसमें एक बार जब चिता जल जाती है तो मुखाग्नि देने वाला बांस के डंडे से मृ-त व्‍यक्ति की खोपड़ी पर 3 बार मारा जाता हैं । क्‍योंकि एक बार में वो आसानी से नहीं टूटती है इसल‍िए 3 बार मारते हैं। जब वो खोपड़ी को डंडे से मारकर तोड़ते है तो चिता की गर्मी की वजह से वो जल्‍दी टूट जाती हैं ।

2. महिलाओं को शमशान घाट नहीं जाने दिया जाता

ऐसा कहते हैं, कि महिलाओं का दिल पुरुषों के मुकाबले बेहद ही नाज़ुक होता हैं ।ऐसा बोला जाता है कि अगर शमशान घाट पर कोई महिला अंतिम संस्कार के वक़्त रोने या डरने लग जाए तो मृत-क की आ-त्मा को शांति नहीं मिल पाती हैं ।

3. सिर का मुंडन

हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार के बाद लोग अपना सिर भी मुंडवा देते हैं। सिर मुंडवाने की प्रथा घर के सभी पुरुषों के लिए अनिवार्य होती हैं ।

क्‍या होता है आत्‍मा का?

शास्‍त्रों में ऐसा ल‍िखा है कि शरीर मरता है लेकिन आत्‍मा कभी नहीं मरती हैं । किसी व्‍यक्ति के मरने के बाद आत्‍मा तुरंत किसी अन्‍य गर्भ में प्रवेश कर लेती हैं । ऐसा कहते है कि जब कोई आत्‍मा अपने शरीर को छोड़ती है तो वो पूरी तरह धरती को छोड़ नहीं पाती हैं । मरने के बाद उसकी आत्मा तेरह दिनों तक अपने प्रियजनों के पास ही रहती हैं.

क्यों लिया जाता है भगवान राम का नाम

हिंदू धर्म में भगवान राम की बहुत मान्यता हैं. ऐसा कहा जाता है किअगर किसी ने भगवान राम के नाम का 3 बार जप कर लिया तो यह अन्य किसी भगवान के 1000 बार नाम जपने के बराबर होता हैं । इसलिए अक्सर आप सबने देखा होगा कि बॉडी को ले जाते वक़्त ‘राम नाम सत्य है’ कहते हुए जाया जाता हैं.

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