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आखिर लोग फ़ोन पर सबसे पहले हैलो ही क्यों बोलते हैं, जानें क्या है सच्चाई

आज के समय में लगभग हर इंसान के पास मोबाइल फोन तो होता ही हैं. ये मोबाइल फ़ोन या फिर घर में मौजूद लैंडलाइन पर हम लोग बात करते वक़्त सबसे पहले हैल्लो बोलते हैं. ये मोबाइल फ़ोन हमारी जिंदगी का एक ज़रूरी हिस्सा बन गया हैं.  लेकिन क्या आप जानते है कि फ़ोन पर हैल्लो ही क्यों बोलते हैं? तो आयिए आज हम आपको इसके पीछे छुपे रहस्य के बारे में बताते हैं.

हम लोगों को चाहें किसी को फ़ोन करना हो या किसी का फ़ोन रिसीव करना हो, तब हम सबसे पहले सिर्फ एक ही शब्द बोलते है- वो हैं “हैल्लो”.  दुनिया का चाहें कोई भी कोना हो, लोग बात करने के लिए मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल करते हैं. हम लोग बचपन से ही देखते आ रहे है कि बात करते वक़्त हम “हैल्लो” शब्द का उपयोग करते हैं. लेकिन यही शब्द क्यों बोला जाता है तो हम आपको इसके पीछे के एक मज़ेदार किस्से के बारे में बताते हैं.

हैलो शब्द का मतलब :

अब हम आपको इस “हैल्लो” शब्द का मतलब क्या होता है, ये बताते हैं. अगर ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी में देखा जाए तो, “हैलो” शब्द का प्रयोग 1827 में किया गया था.  इस हैलो का मतलब हाय नहीं होता है. सन् 1830  में “हैलो” शब्द का प्रयोग लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जाता था. हैलो शब्द ‘हाला’ या ‘होला’ से बना है. दरअसल, ये एक जर्मन और फ्रांसीसी शब्द होला से निकला है, जिसका मतलब होता है-  “कैसे हो या क्या तुम वहां हो या क्या तुम सुन रहे हो ?

 अब इसके पीछे के रहस्य के बारे जानते हैं. दरअसल ऐसा बताया जाता है कि बीच समुद्र में रात के समय नाविक एक-दूसरे के बोट को नहीं देख पाते थे, इसलिए वो एक दूसरे से संपर्क करने और हाल-चाल पूछने के लिए ‘Ahoy! Hoy’ शब्द का इस्तेमाल किया करते थे. इसके अलावा ऐसा भी कहा ये भी जाता है कि हैलो शब्द होला से आया है और इसका मतलब होता हैं ठहरो और ध्यान दो.

ग्राहम बेल की गर्लफ्रेंड का नाम हैलो था :

इस बात से आप सभी वाकिफ़ होंगे कि टेलीफोन का अविष्कार करने वाले अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने  टेलीफोन का आविष्कार किया था. उन्होंने ये आविष्कार 10 मार्च 1876 को किया था. आपकी जानकारी के लिए बता दें, कि  इस किस्से की सच्चाई ये है कि ग्राहम की गर्लफ्रेंड का नाम “हैलो” था. इस वजह से ही वो बात करते वक़्त हैल्लो शब्द का उपयोग करते थे. लेकिन  ग्राहम बेल की गर्लफ्रेंड मारग्रेट हैलो थीं, इस बात का कहीं कोई साक्ष्य उपबल्ध नहीं है. बताया जाता है कि ग्राहम बेल की गर्लफ्रेंड का नाम ‘Mabel Hubbard’ था और उन्होंने 1877 में Mabel से शादी की थी और शादी के बाद उन्होंने अपना नाम माबेल बेल रख लिया था. इसका ये मतलब है कि इस बात में पूरी तरह से सच्चाई नहीं हैं.

सबसे पहले ये कहा गया :

शायद आप ये नही जानते होंगे कि ग्राहम बेल ने कभी भी “Hello” शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था. टेलीफोन का आविष्कार करने के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने असिस्टेंट को फ़ोन पर बोला था, “Come-here. I want to see you.” इसके अलावा ये भी कहा जाता है कि ग्राहम बेल ‘Ahoy!  शब्द का इस्तेमाल करते थे. इसी शब्द का इस्तेमाल फ़ोन पर बात शुरू करने से पहले किया जाने लगा था .

 क्या आप जानते है कि हैलो शब्द के पीछे एडिशन का भी नाम आता है. उस वक्त एडिशन टेलीफोन को सिर्फ बिजनेस डिवाइस मानते थे, जो एक पार्टी से दूसरी पार्टी बात कर सकती थी. लेकिन उसके साथ समस्या थी कि टेलीफोन पर दूसरी तरफ वाला आदमी कैसे जानेगा कि उस तरफ वाला आदमी क्या कहना चाहता है, और एडिशन ने इस समस्या को पहचाना. उन्होंने सोचा की 10 से 20 फीट की दूरी पर इसे सुना जाना चाहिए.

एडीशन हैं इसकी वजह :

जब इस दूरी पर ‘Ahoy’ बोला गया तो दूसरी ओर आवाज आई. लेकिन थॉमस एडिसन ने ‘Ahoy’ को गलत सुन लिया और साल 1877 में उन्होंने ‘Hello’ बोलने का प्रस्ताव रखा दिया था. बता दें, कि बेल टेलीफोन पर बात करते वक्त अहो “Ahoy!” शब्द का इस्तेमाल करते थे, जो बदल कर हैलो शब्द बन गया था.

तो दोस्तों,  इस बदलाव को लाने के लिए उन्होंने 15 अगस्त 1877 में पिट्सबर्ग की ‘सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट एंड प्रिंटिंग टेलीग्राफ कम्पनी’ के अध्यक्ष टीबीए स्मिथ को पत्र लिखा और कहा- “कि टेलीफोन पर पहले शब्द के रूप में ‘Hello’ बोला जाना चाहिए. इसके बाद जब उन्होंने पहली बार फोन किया तो सबसे पहले उन्होंने कहा ‘Hello’.

इस तरह दुनिया ने हैलो को अपनाया :

28 जनवरी , 1878 को न्यू हेवन ने इस हैल्लो का शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था. यही वजह है यूनाइटेड स्टेट में इस एडिशन के इस शब्द को भी अपना लिया गया था .


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