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तस्वीरों के ज़रिये जानिये कुछ बेहद दिलचस्प और जानकारी भरी बातें

स्त्री की यो-मुक्त की गहराई और व्यास कितनी होती है? क्या जिन महिलाओं के बच्चे होते हैं उनकी यो-मुक्त की गहराई अधिक हो जाती है? सबसे पहले तो आप यह समझ लें की यो-मुक्त की गहराई कहां से और किस प्रकार नापी जाती है. यो-मुक्त के आगे भाग को भग कहते हैं जिसमें लघु और बृहद भगोष्ठ होते हैं.

कितनी होती है यो-मुक्त की गहराई ?

लघु भगोष्ठ अंदर उस स्थान से प्रारंभ होते हैं जहां कुमार छिद्र होता है. इस स्थान से भग के बाहरी छोड़ तक अर्थात लघु भगोष्ठों के छोड़ तक के भाग को प्रायः यो-मुक्त कीप कहा जाता है. क्योंकि इस भाग की रचना कुछ कुछ कीप जैसी होती है. अर्थात बाहर से चौड़ी, अंदर से संकरी. वास्तविक यो-मुक्त कुमार छिद्र के स्थान में गर्भाशय ग्रीवा तक होती है.

यो-मुक्त के अगले भाग अर्थात कीप की लंबाई देढ से लेकर दो इंच तथा वास्तविक यो-मुक्त की लंबाई तीन से लेकर साढ़े तीन इंच तक होती है. इस प्रकार संपूर्ण यो-मुक्त मार्ग की लंबाई या गहराई पाँच से साढ़े पाँच इंच तक हो जाती है और यही लंबाई औसत पुरुष के शिश्न की होती है. सं-भोग करने पर आवश्यकतानुसार बिना किसी कठिनाई और पीड़ा के यह आसानी से फैल जाती है.

यो-मुक्त के ऊपरी हिस्से की सामान्य चौड़ाई दो से ढाई इंच तक होती है. जिन स्त्रियों के अधिक बच्चे होते हैं उनका गर्भाशय नीचे वस्ति में झुक जाता है, जिससे यो-नि की गहराई कम हो जाते हैं. संभवतः यह गहराई ढाई या तीन इंच से अधिक नहीं होती, क्यूंकि यो-नि की दीवारें लचीली होती हैं इसीलिए सं-भोग में कोई बाधा नहीं होती है.

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