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क’न्या को उ’पहार में ज’रूर दें ये ची’ज़ें, मा’ना जा’ता है बे’हद शु’भ, मा’ता हो’ती हैं प्र’सन्न…

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नव’रात्रि के दि’नों में लो’ग मा’ता रा’नी को खु’श क’रने के लो’ग कन्या’ओं को भो’जन क’राते हैं। भो’जन करा’ने के सा’थ ही कन्या’ओं को पे’ट में कु’छ उप’हार भी दे’ते हैं। मा’न्यता है कि नव’रात्र में मां भवा’नी इ’न छो’टी कन्या’ओं के रू’प में आशी’र्वाद दे’ने आप’के घ’र आ’ती हैं। इ’न कन्या’ओं को आ’दर के सा’थ घर बु’लाना चा’हिए औ’र ने सम्मा’न के सा’थ भोज’न करा’कर भें’ट भी दे’नी चा’हिए।

नवरा’त्रों में आ’प क’न्या पूज’न क’रें तो कन्या’ओं को उप’हार के रू’प में ला’ल व’स्त्र दे’ने का विशे’ष प्राव’धान हो’ता है। अ’गर कि’सी वज’ह से आ’प ला’ल व’स्त्र दे’ने में अस’मर्थ है तो स’भी कन्या’ओं को ला’ल रं’ग की चुन’री ज’रूर दे’ना। इस’को वृ’द्धि का प्र’तीक मा’ना जा’ता है ऐ’से सा’थी ला’ल रं’ग की पो’शाक दे’ना भी बे’हद शु’भ हो’ता है।

नव’रात्रि का क’न्या भो’ज करा’ने के लि’ए कन्या’ओं को क’म से क’म एक मौस’मी फ’ल ज’रूर दे’ना चाहि’ए। मा’ना जा’ता है कि नव’रात्र में क’न्या को फ’ल दे’ने से आ’पको अ’पने अ’च्छे क’र्मों का फ’ल क’ई गु’ना वाप’स प्रा’प्त हो’ता है। फ’लों में स’बसे सफ’ल के ला’या नारि’यल को मा’ना जा’ता है मा’ना जा’ता है कि के’ला वि’ष्णु जी का प्रि’य फ’ल औ’र ना’रियल या’नी श्री व’रलक्ष्मी को प्रि’य है।

नव’रात्र में क’न्या स’मृद्धि के बा’द पे’ट में कन्या’ओं को श्रृंगा’र की सा’मग्री की उ’पाधि दे सक’ते हैं। य’ह श्रृं’गार सा’मग्री पह’ले मा’ताओं को अर्पि’त क’रें औ’र उस’के बा’द छो’टी-छो’टी कन्या’ओं में नेता’ओं द्वा’रा की ग’ई सा’मग्री दी जा’ती है।