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कर’वाचौथ: इ’स स’मय नि’कलेगा चां’द, सुहा’गनें पू’जा क’रते स’मय र’खें इ’न बा’तों का ख्या’ल….

धार्मिक खबर

वि’वाहित रि’श्ते के प्रे’म ए’वं पवि’त्रता का प्रती’क कर’वा चौ’थ प’र्व बुध’वार चा’र नवं’बर को है। इ’स दि’न सुहा’गिनें प’ति की दी’र्घायु ए’वं कुश’लता के लि’ए नि’र्जला व्र’त रख’ती हैं। कर’वाचौथ को लेक’र नववि’वाहित जो’ड़ों में खा’सा उ’त्साह है। 

डॉ. आ’चार्य सु’शांत रा’ज के अ’नुसार, कर’वा चौ’थ का व्र’त का’र्तिक मा’स में कृ’ष्ण प’क्ष की चतु’र्थी को र’खा जा’ता है। मान्य’ता है कि सु’हागिनों के त्या’ग ए’वं त’प का फ’ल उ’न्हें अव’श्य प्रा’प्त हो’ता है। इस’में शि’व-पार्व’ती औ’र ग’णेश भग’वान की पू’जा की जा’ती है। चां’द निक’लने प’र अ’र्घ्य देक’र छल’नी में प’ति का चे’हरा दे’खा जा’ता है। प’ति के हा’थों ज’ल पी’कर व्र’त पू’रा कि’या जा’ता है। 

य’ह है मुहू’र्त
चतु’र्थी ति’थि: चा’र न’वंबर सुब’ह 3:24 ब’जे से 5 नवं’बर सुब’ह 5:14 ब’जे त’के। 
क’रवा चौ’थ मुहू’र्त: शा’म 5:29 ब’जे। 
चं’द्रोदय : रा’त 8 :16 ब’जे। 

सुहा’गिनें चंद्र’मा को अ’र्घ्य देक’र पू’जा क’रें। व्र’त खोल’ने के बा’द प’ति औ’र ब’ड़ाें का आ’शीर्वाद लें। य’ह बा’त ज’रूर ध्या’न र’खें कि पू’जा की था’ली में छ’लनी, आ’टे का दी’या, फ’ल, ड्राई’फ्रूट, मिठा’ई औ’र दो पा’नी के लो’टे हो’ने चाहि’ए। 

सु’हाग जि’स चु’न्नी को ओढ़’कर क’था सु’ने उ’सी चु’न्नी को ओ’ढ़कर चंद्र’मा को अ’र्घ्य दें। छल’नी में दी’या रख’कर चं’द्रमा को उ’समें से दे’खे औ’र फि’र उ’सी छल’नी से तु’रंत अप’ने प’ति को दे’खें। इस’के बा’द आ’प बा’यना (खा’ना औ’र कप’ड़े, दक्षि’णा ) नि’लाकर अ’पने ब’ड़ों को दें औ’र फि’र खा’ना खा’एं। इ’स दि’न ल’हसुन-प्या’ज वा’ला औ’र ताम’सिक खा’ना न बना’एं।