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इस तरह होता हैं किन्नरों का अंतिम संस्कार, पार्थिव शरीर के साथ किये जाते हैं ऐसे काम

किन्नर की दुआ और बददुआ दोनों ही बहुत असरदार होती हैं. किन्नर समाज का ऐसा समुदाय हैं जिन्हें लोग पहचानते तो हैं लेकिन उनके निजी जीवन के बारे में बहुत कम जानते हैं. किन्नर अपनी दुआओं से हमारे जीवन में खुशियों की बहार लाते हैं. लेकिन वे अपने दुःख दर्द में किसी गैर को शामिल करना पसंद नहीं करते हैं. इसके पीछे भी एक गहरा राज छिपा हुआ हैं. पहली किन्नर का अंतिम संस्कार कैसे होता हैं और दूसरी उनके पार्थिव शरीर के साथ क्या किया जाता हैं.

जब भी किसी किन्नर की मृत्यु हो जाती हैं तो उसमे गैर-किन्नरों यानी आम लोगो को शामिल नहीं किया जाता हैं. ऐसी मान्यता हैं कि यदि कोई आम व्यक्ति किन्नर का अंतिम संस्कार देख लेता हैं तो अगले जन्म में वो भी किन्नर ही बनता हैं. मृत किन्नर की पार्थिव शरीर को बाकी किन्नर जूते चप्पल से पिटते हैं. ऐसा कहा जाता हैं कि यह करने से इस जन्म में करे गए सभी पापों से मुक्ति मिल जाती हैं. इसके अलावा किन्नर की मौत होने पर उस समुदाय के लोग एक हफ्ते तक खाना भी नहीं खाते हैं.

वैसे तो किन्नर समुदाय सभी हिंदू रीती रिवाजों को मानता हैं लेकिन अंतिम संस्कार करते समय इनकी पार्थिव शरीर को जलाने की बजाए दफनाया जाता हैं. यह प्रक्रिया रात में ही की जाती हैं ताकि आम लोग इसे ना देख सके. किन्नर समुदाय अपने साथ की मौत पर मातम नहीं मनाता हैं. बल्कि ये लोग किन्नर की मौत का जश्न मनाते हैं. ऐसा कहा जाता हैं कि मरने के बाद किन्नर को नरक युगी जीवन से मुक्ति मिल जाती हैं. अगले जन्म में वो सामान्य इंसान की तरह पैदा होता हैं.

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