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आखिर क्यों होता है रात में किन्नरों का अंतिम संस्कार, किसी को देखने की इजाजत नही होती,वजह जानकर हो जायेगे हैरान….

हिंदी खबर

अक्सर आपने देखा होगा की शादी, त्यौहार या बच्चे के जन्म पर पता नहीं कहा से किन्नर हमारे घर आ जाते है और अच्छी खासी बख्शीस लेकर वापस अपनी दुनिया में कही गायब हो जाते है। आपने शायद ही इन्हे किसी त्यौहार को मनाते या किसी त्यौहार में हिस्सा लेते देखा हो। हम किन्नर के बारे में आज भी ठीक से नहीं जानते उनके रीत-रिवाज़ दीन दुनिया से अलग ही होते है।

यहाँ तक की उनके अंतिम संस्कार को भी कोई नहीं जानता। लेकिन आज हम आपको उनके कुछ रीत-रिवाजो के बारे में बताएंगे।
किन्नरों के रीत-रिवाज़
भारत में ऐसा माना जाता है की शायद किन्नर के पास कुछ आध्यात्मिक शक्ति होती है जिससे उनको अपनी मौत का आभास हो जाता है किन्नर अपनी मौत से कुछ दिन पहले खाना-पीना बंद कर देते है। और इस दौरान वह कही भी जाना पसंद नहीं करते। वह अपना अंतिम समय सिर्फ पानी पीकर बिताते है। वह मरते हुए अपने लिए और वाकी किन्नरों के लिए यही दुआ करते है की अगले जन्म में वह किन्नर ना पैदा हो।
उनके आसपास के जानने वाले किन्नर मरने वाले से दुआ लेने आते है किन्नरों में ऐसा माना जाता है की मरने के समय किन्नर की दुआ काफी असरदार होती है। वह हमेशा यह एहतियात बरतते है की मरने की खबर उनके अलावा किसी और को ना हो। अंतिम संस्कार करने से पहले मरने वाले को खूब गालिया दी जाती है और जूते चप्पल से मारा जाता है। जिससे अगर उसने कोई अपराध किया हो तो उसका प्रायश्चित हो जाए। और अगले जन्म में पूर्ण इंसान पैदा हो।
मरने वाले को अंतिम संस्कार के लिए चार कंधों पर नहीं बल्कि खड़ा करके ले जाया जाता है। किन्नरों का ऐसा मानना है की अगर कोई बाहरी मरने वाले को देख ले तो मरने वाला फिर अगले जन्म में किन्नर ही पैदा होता है।
किन्नर का अंतिम संस्कार आधी रात के समय होता है ताकि कोई यह सब ना देख पाए। मृत शरीर को जलाने के जगह दफनाया जाता है। किन्नर की मौत के एक हफ्ते तक किन्नर के साथी पूरे एक सप्ताह तक व्रत रखते है और मृतक के लिए दुआ मांगते है की अगले जन्म में वह साधारण इंसान की तरह पैदा हो। किन्नर के मरने पर मातम नहीं मनाया जाता वल्कि वह ख़ुशी मानते है। इनके यंहा ऐसी मान्यता है की किन्नर की मृत्यु होने से उसे इस नर्क के समान जीवन से मुक्ति मिली है।