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वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर आपके किचन मे हैं ये चीजें तो तुरंत हटा दें, वरना…

घर का रसोईघर घर का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता हैं. अगर रसोईघर में कुछ वस्तुओं की जगह गलत हो तो उससे पुरे घर पर असर पड़ता हैं. आज हम आपको बतायेंगें वास्तुशास्त्र के अनुसार रसोईघर में कौन सी वस्तु हो और कौन सी नहीं हो. वास्तुशास्त्र के अनुसार अगर आपके किचन में भी है ये वस्तुयें तो तुरंत हटा दें, वरना इससे काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं. आज हम आपको बताने जा रहे हैं आपके रसोईघर के बारे में.

सबसे पहले हम जानते हैं रसोईघर की दिशा के बारे में: 1 वास्तु विज्ञान के अनुसार रसोईघर आग्नेय कोण में होना शुभ फलदायी होता है। यदि ऐसा नहीं है तो इससे घर में रहने वाले लोगों की सेहत, खासतौर पर महिलाओं की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अन्न-धन की भी हानि होती है। इससे पाचन संबंधी अनेक बीमारियां हो सकती हैं. 2 चूल्हा आग्नेय में, प्लेटफॉर्म पूर्व व दक्षिण को घेरता हुआ होना चाहिए. वॉश बेसिन उत्तर में हो. भोजन बनाते समय मुख पूर्व की ओर हो, उत्तर व दक्षिण में कतई नहीं. 3 – जिस घर में रसोईघर दक्षिण-पूर्व यानी आग्नेय कोण में नहीं हो तब वास्तु दोष को दूर करने के लिए रसोई के उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में सिंदूरी गणेशजी की तस्वीर लगानी चाहिए। यदि आपका रसोईघर अग्निकोण में न होते हुए किसी ओर दिशा में बना है तो वहां पर यज्ञ करते हुए ऋषियों की चित्राकृति लगाएं.

इन वस्तुओं को ना रखें अपने रसोईघर में: * रसोई में तीन चकले न रखें, इससे घर में क्लेश हो सकता है.* रसोई में हमेशा गुड़ रखना सुख-शांति का संकेत माना जाता है.* टूटे-फूटे बर्तन भूलकर भी उपयोग में न लाएं, ऐसा करने से घर में अशांति का माहौल बना रहता है.* अंधेरे में चूल्हा न जलाएं, इससे संतान पक्ष से कष्ट मिल सकता है.* नमक के साथ या पास में हल्दी न रखें, ऐसा करने से मतिभ्रम की संभावना हो सकती है.* रसोईघर में कभी न रोएं, ऐसा करने से अस्वस्थता बढ़ती है.* रसोई घर पूर्व मुखी अर्थात् खाना बनाने वाले का मुंह पूर्व दिशा में ही होना चाहिए. उत्तर मुखी रसोई खर्च ज़्यादा करवाती है.

* यदि आपका किचन आग्नेय या वायव्य कोण को छोड़कर किसी अन्य क्षेत्र में हो, तो कम से कम वहां पर बर्नर की स्थिति आग्नेय अथवा वायव्य  कोण की तरफ़ ही हो.* रसोई घर की पवित्रता व स्वच्छता किसी मंदिर से कम नहीं होनी चाहिए. ऐसा करने से मां अन्नपूर्णा की कृपा बनी रहती है.* रसोईघर हेतु दक्षिण-पूर्व क्षेत्र का प्रयोग उत्तम है, किन्तु जहां सुविधा न हो वहां विकल्प के रूप में उत्तर-पश्‍चिम क्षेत्र का प्रयोग किया जा सकता है,  किन्तु उत्तर-पूर्व मध्य व दक्षिण-पश्‍चिम क्षेत्र का सदैव त्याग करना चाहिए.

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