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अनो’खा गां’व: मही’नों सो’ते है इ’स गां’व के लो’ग, जा’निए इस’के पी’छे की चौं’का दे’ने वा’ली वज’ह…

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कजा’किस्तान : हम’ने रा’मायण में सु’ना था कि कुंभ’कर्ण की नीं’द के बा’रे में की वो 6 मही’ने सो’ता है औ’र 6 म’हीने जग’ता है। ले’किन ह’म आ’पको ब’ता दें कि आ’ज के यु’ग में भी ऐ’से लो’ग है जो मही’नों – म’हीनों सो’ते हैं। कजा’किस्तान का ए’क गां’व है ज’हां ऐ’से लो’ग दे’खने को मि’लेंगे जो मही’नों म’हीनों सो’ते हैं। आ’इए जा’नते हैं इ’स गां’व की हकी’कत औ’र इ’न लो’गों के सो’ने की वज’ह।

इ’स नीं’द का कार’ण य’ह है

कजाकि’स्तान में ए’क कला’ची गां’व है ज’हां लो’ग मही’ने – मही’ने सो’ते हैं। इ’स गां’व को स्ली’पी हॉ’लो भी क’हते हैं। आप’को ब’ता दें कि य’हां के लो’ग अक्स’र सो’ते हु’ए ही नज’र आ’ते हैं। इ’स गां’व में क’ई शो’ध हो चु’के हैं लेकि’न आ’ज त’क को’ई पु’ख्ता प्र’माण न’हीं मि’ल पा’या है। बता’या जा’ता है कि इ’स गां’व में यूरेनि’यम की का’फी जहरी’ली गै’स नि’कलने के कार’ण ऐ’सा हो’ता है। इ’स ख’दान का सा’लों से इस्तेमा’ल न’हीं हु’आ है इस’लिए य’हां का पा’नी का’फी दूषि’त है। इस’के प्रभा’व से जो व्य’क्ति ए’क बा’र सो’ता है वो ए’क म’हीने के बा’द ही उठ’ता है। वैज्ञा’निकों ने य’ह शो’ध कि’या य’हां के पा’नी में भी का’र्बन मो’नो ऑक्साइ’ड की गै’स पा’ई जा’ती है। इ’स वज’ह इ’स गां’व के लो’गों की य’ह स्थि’ति है।

सो’ने के बा’द न’हीं रह’ता कु’छ भी या’द

कजा’किस्तान के इ’न लो’गों को नीं’द में जा’ने के बा’द कु’छ या’द न’हीं रह’ता है। आप’को ब’ता दें कि य’हां के लो’गों की आबा’दी 600 लो’गों की है। जि’समें से 14 फीस’दी लो’गों को इ’स बी’मारी ने अप’ने च’पेट में ले लि’या है। नीं’द में जा’ने के बा’द इ’न लो’गों को कु’छ या’द न’हीं रह’ता है। ज’ब इ’न्हें दू’सरे लो’ग बता’ते हैं त’ब जा’कर इ’न्हें या’द आ’ता है।

क’भी भी क’हीं भी सो जा’ते ये लो’ग

इ’स बीमा’री से परेशा’न य’ह लो’ग क’हीं भी औ’र क’भी भी सो जा’ते हैं। आप’को ब’ता दें कि य’हां के लो’ग रा’स्ते में चल’ते चल’ते सो जा’ते हैं। इ’न लो’गों का क’हना है कि इ’न लो’गों को नीं’द का एह’सास न’हीं हो’ता है। कु’छ स’मय के लि’ए य’ह लो’ग सप’नों की दुनि’या में च’ले जा’ते हैं।