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Ahoi Ashtami 2020: इस कुंड में स्ना’न करने से आप’को होगी पुत्र र’त्न की प्रा’प्ति

धर्म न्यूज़

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प्रत्येक वर्ष करवा’चौथ के ठीक चार दिन बाद यानि का’र्तिक मास के कृ’ष्ण पक्ष की अ’ष्टमी तिथि को अहोई अष्ट’मी का पर्व मनाया जाता है। करवा’चौथ के दिन महि’लाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए तो वहीं अ’होई अष्ट’मी के दिन महि’लाएं अपने सं’तान की तर’क्की व लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। सना’तन धर्म में इस व्रत को विशे’ष महत्व है। बता दें इस बार अहोई अष्ट’मी का पर्व 08 नवं’बर, दिन रवि’वार को मनाया जा’एगा। इस खास अव’सर पर हम आपको एक ऐसे जगह के दर्श’न करवाने वाले हैं, जहां अगर कोई निसं’तान दंप’त्ति दर्शन करती हैं, व वहां स्थित कुंड में श्रद्धा विश्वा’स से स्नान करती है तो उन्हें निश्चित ही संतान की प्राप्ति होती है। तो च’लिए आपके इंत’ज़ार को ख’त्म करते हुए बता’त हैं कहां हैं ये मंदिर-

दरअ’सल जिस कुंड की हम बात कर रहे हैं वो और कहीं नहीं ब’ज्र में स्थित है। जी हां, मथुरा से लग’भग 26 कि.मी दूर एक कुंड स्थि’त है जिस राधा’कुंड के नाम से जाना जाता है। बता’या जाता है ये कुंड का धार्मिक और पौरा’णिक दोनों ही दृष्टि से म’हत्व रखता है। कहां जाता है इस कुं’ड में इतनी श’क्ति है कि केवल यहां डुबकी लगाने मात्र से दंप’त्ति को संतान प्राप्त हो सकती है।

विशे’ष तौर पर यहां अहोई अष्ट’मी की रात 12 बजे स्नान करने का मान्य’ता प्रच’लित है कि कोई इस समय यहां स्ना’न करता है तो उसे पुत्र रत्न प्रा’प्ति का आशी’र्वाद प्राप्त हो सकता है। यही कार’ण है कि प्रत्ये’क वर्ष अहोई अष्टमी पर यहां महा’स्नान का आयो’जन होता है, जिसमें हज़ारों की तादाद में लोग पहुंचते हैं।

यहां श्री कृष्ण ने दिया था राधा रानी को वरदान
इस कुंड से जुड़ी पौरा’णिक कथा के अनु’सार प्रा’चीन समय में एक बार अरि’ष्टासुर ने गाय के बछ’ड़े का रूप धारण कर श्रीकृ’ष्ण पर हमला किया, जि’सका श्री कृष्ण ने वध कर दिया था। इसके बाद जब श्री कृ’ष्ण राधा रानी के पास गए तो राधा’रानी ने उन्हें बता’या कि जब अरिष्टा’सुर का वध किया तब वह गौवंश के रूप में था, जिस का’रण उन पर गौ’वंश हत्या का पाप लग गया है।

ऐसी कथा’एं हैं कि इस पाप से मुक्ति का उपा’य करने के लिए श्रीकृ’ष्ण ने अपनी बांसुरी से एक कुंड जिसका नाम श्याम कुंड था, उसे खोदा व उसमें स्नान किया। इसके उप’रांत ब्रज मंड’ल की अधिष्ठा’त्री देवी राधा रानी ने भी श्याम कुंड के बग’ल में अपने कंगन मात्र से एक और कुंड खोदा, जिसे आज के स’मय में राधा कुंड के नाम से जाना जाता है। जिसमें श्री कृष्ण ने स्नान भी किया। ऐसा कहा जाता है कि यहां स्नान करने के बाद राधा जी और श्रीकृ’ष्ण ने वहां महारास रचाया, जिससे प्रस’न्न होकर भग’वान कृ’ष्ण ने राधा को वरदान मांगने को कहा। तब राधा रानी जी उन्हें कहा कि जो भी इस तिथि को राधा कुंड में स्नान करे, उसे पुत्र रत्न की प्रा’प्ति हो, ऐसा वर’दान दें। जिस कार’ण अहोई अष्ट’मी के दिन यहां स्नान करने की परंपरा प्रच’लित हुई है।

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