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चरित्र’हीन होती हैं ये महि’लाएं! यकीन न हो तो देखें ये ल’क्षण, कहीं…

डेली न्यूज़

लखनऊ: जैसा की आप सभी जानते हैं ह’मारे हिन्दू धर्म में महि’लाओं को देवी का द’र्ज़ा दिया गया है। कहा जाता है कि महि’लायें बहुत को’मल और शांत स्व’भाव की होती हैं,साथ ही उनमे शहन’शीलता पुरु’षों से ज्या’दा होती है,लोगों का तो मन’ना है कि महि’लाओं के स्वा’भाव और दि’माग को सम’झना बहुत मुश्कि’ल काम है।

हर व्य’क्ति यही चाहता है कि उसे एक अच्छी और चरित्र’वान प’त्नी मिले, लेकिन आज के स’मय में चरित्र’वान लड़’की मिलना बहुत मुश्कि’ल होता है, तो चलि’ये आज हम आप’को कुछ संकेत बता’येंगे जिससे आप पता लगा स’केंगे कि लड़की चरित्र’वान है की नहीं।

पति का नहीं करती सम्मान

ऐसे महि’लायें अपने पति का सम्मा’न नही करती और हमेशा उनसे लड़’ती ही रहती है और अपने पति से जु’बान तक लड़ा’ने में नही डरती। छोटी छोटी बातों पर अपने पति से हमे’शा लड़ती झग’ड़ती रहती हैं। सुख में तो मीठा मीठा बोल’ती हैं लेकिन जैसे ही कोई दुख की घड़ी आती है तो अ’पना रंग दि’खाना शुरू कर देती हैं।अपने ससु’राल में रानी के जैसे रह’ना चाहती हैं और किसी भी काम मे हाथ तक नही बटाती’। ये महि’लायें अपने सास ससुर को अपने माँ जैसा प्यार नही क’रती और ना ही उनका कोई आदर स’त्कार करती हैं।

ऐसी महि’लाओं की पह’चान सामान्य तौर पर करना तब तक सं’भव नहीं है जब तक कि उन्हें अच्छे से जान ना लि’या जाए। लेकिन भा’रत के प्रसि’द्ध ग्रंथ बृहद संहि’ता के अनु’सार ऐसे कई तरीके हैं जिनसे स्त्री के चेहरे-मोह’रे को देख’कर ही उसके स्व’भाव का पता लगा’या जा सकता है। स्त्री के चेहरे और उसके शरीर’ पर कुछ ऐसे लक्ष’ण होते हैं जो उसे ल’क्ष्मी का स्व’रूप नहीं बल्कि कुल’क्ष्मी करार देते हैं।

चाणक्य नीति में

आचार्य चाण’क्य ने अपनी किताब चाण’क्य नीति में चरित्र’हीन औरत के बारें में कई ऐसी बाते बताई है। जिन्हें जान’कार आप किसी चरित्र’हीन स्त्री के प्यार में नहीं प’ड़ेगे , चाणक्य ने बताया है की स्त्री एक बहुत ही पूज’नीय  है,चाणक्य के वेदों में स्त्री को देवी कहा जाता है पर कुछ महि’लायें ऐसे भी होती है जो अपनी दुश्च’रित्र की वज’ह से अपने से जुड़े लो’गों के जीवन पर गलत प्रभा’व डालती है।

उन्होंने बता’या है कि ऐसी महि’लाओं को केवल एक पुरु’ष से प्यार करना नहीं आता, ये महि’लायें दिल और जुबां का ताल’मेल नहीं बनाती, इनके मन में कुछ और चल रहा होता है और जु’बान पर कुछ और। उप’र्युक्त बातें सिर्फ लोक मान्य’ताओं को मा’नने वालों के लिए हैं।