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जा’नें भ’गवान शि’व के ज’न्म से जु’ड़ा ये ब’ड़ा र’हस्य, सोम’वार को भग’वान शि’व क्यों रह’ते है ज्या’दा….

धार्मिक खबर

सो’मवार (Monday) का दि’न भ’गवान शि’व (Lord Shiva) को सम’र्पित है. ऐ’से में क’हा जा’ता है कि अ’गर सोम’वार को भग’वान शि’व की स’च्चे म’न से पू’जा की जा’ए तो सा’रे क’ष्टों (Pains) से मु’क्ति मिल’ती है औ’र स’भी मनो’कामना पू’री हो’ती है. शि’व स’दा अ’पने भ’क्तों प’र कृ’पा बर’साते हैं. मा’न्यता है कि भ’गवान शि’व को खु’श क’रने के लि’ए सोम’वार को सु’बह उ’ठकर स्ना’न क’रके भग’वान शि’व की आरा’धना क’रनी चाहि’ए. ऐ’सी मा’न्यता है कि इ’स दि’न स’च्चे म’न से भो’ले भग’वान की पू’जा कर’ने से स’भी मनोका’मनाएं पू’री हो’ती हैं. भग’वान शि’व को स्व’यंभू क’हा जा’ता है जिस’का अ’र्थ है कि व’ह अ’जन्मा हैं. व’ह ना आ’दि हैं औ’र ना अं’त. भो’लेनाथ को अ’जन्मा औ’र अवि’नाशी क’हा जा’ता है. आ’इए जा’नते हैं उन’के ज’न्म से जु’ड़ा र’हस्य आखि’र क्या है.

त्रि’देवों में भ’गवान शं’कर को मह’त्वपूर्ण स्था’न प्रा’प्त है. भग’वान ब्र’ह्मा सृज’नकर्ता, भग’वान वि’ष्णु संर’क्षक औ’र भग’वान शि’व विना’शक की भूमि’का नि’भाते हैं. त्रि’देव मि’लकर प्र’कृति के निय’म का संके’त दे’ते हैं कि जो उ’त्पन्न हु’आ है, उस’का वि’नाश भी हो’ना त’य है. इ’न त्रि’देव की उ’त्पत्ति खु’द ए’क रह’स्य है. क’ई पुरा’णों का मान’ना है कि भग’वान ब्र’ह्मा औ’र भग’वान वि’ष्णु शि’व से उत्प’न्न हु’ए. हा’लांकि शिव’भक्तों के म’न में स’वाल उठ’ता है कि भग’वान शि’व ने कै’से ज’न्म लि’या था?



क’हा जा’ता है कि भग’वान शि’व स्व’यंभू है जिस’का अ’र्थ है कि व’ह मा’नव श’रीर से पै’दा न’हीं हु’ए हैं. ज’ब कु’छ न’हीं था तो भग’वान शि’व थे औ’र स’ब कु’छ न’ष्ट हो जा’ने के बा’द भी उन’का अ’स्तित्व रहे’गा. भग’वान शि’व को आदि’देव भी क’हा जा’ता है जिस’का अ’र्थ हिं’दू माइ’थोलॉजी में स’बसे पु’राने दे’व से है. व’ह दे’वों में प्र’थम हैं. हालां’कि भ’गवान शि’व के ज’न्म के सं’बंध में ए’क क’हानी प्रच’लित है. ए’क बा’र भ’गवान ब्र’ह्मा औ’र भगवा’न वि’ष्णु के बी’च जम’कर ब’हस हु’ई. दो’नों खु’द को स’र्वश्रेष्ठ साबि’त क’रना चा’ह र’हे थे. त’भी ए’क रहस्यम’यी खं’भा दि’खाई दि’या. खं’भे का ओ’र-छो’र दि’खाई न’हीं प’ड़ र’हा था. भग’वान ब्र’ह्मा औ’र वि’ष्णु को ए’क आ’वाज सु’नाई दी औ’र उ’न्हें ए’क-दू’सरे से मु’काबला क’रने की चु’नौती दी ग’ई. उ’न्हें खं’भे का पह’ला औ’र आ’खिरी छो’र ढूं’ढने के लि’ए क’हा ग’या.
भग’वान ब्र’ह्मा ने तु’रंत ए’क प’क्षी का रू’प धार’ण कि’या औ’र खं’भे के ऊ’परी हि’स्से की खो’ज कर’ने निक’ल प’ड़े. दूस’री त’रफ भग’वान वि’ष्णु ने वरा’ह का रू’प धा’रण कि’या औ’र खं’भे के आ’खिरी छो’र को ढूंढ’ने नि’कल प’ड़े. दो’नों ने ब’हुत प्र’यास कि’ए ले’किन अस’फल र’हे. ज’ब उन्हों’ने हा’र मा’न ली तो उन्हों’ने भग’वान शि’व को इंत’जार क’रते हु’ए पा’या. त’ब उ’न्हें एह’सास हु’आ कि ब्र’ह्माण्ड को ए’क स’र्वोच्च श’क्ति च’ला र’ही है जो भ’गवान शि’व ही हैं. खं’भा प्र’तीक रू’प में भ’गवान शि’व के क’भी न ख’त्म हो’ने वा’ले स्व’रूप को द’र्शाता है. भग’वान शि’व के ज’न्म के वि’षय में इ’स क’था के अ’लावा भी क’ई क’थाएं प्रच’लित हैं. दर’असल भग’वान शि’व के 11 अव’तार मा’ने जा’ते हैं. इ’न अव’तारों की क’थाओं में रुद्रा’वतार की क’था का’फी प्रच’लित है.