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इस महिला डॉक्टर ने कोरोना से मौत के कुछ समय पहले अपनी बेटी को लिखा ये मेसेज, पढ़कर रोना आ जायेगा

दुनियाभर के देशों की तमाम कोशिशों के बावजूद भी कोरोना का कहर थम नहीं रहा है. हर दिन कोरोना के मरीजों की रफ़्तार काफी तेजी से बढ़ रही है. दुनियाभर के देश इस बीमारी का इलाज ढूढ़ने में लगे हुए हैं न ही इसकी दवा बनी है न ही कोई वैक्सीन तैयार हुई है जिससे लोगों को इस बीमारी से बचाया जा सके. अमेरिका में कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की संख्या 5 लाख से भी ज्यादा हो चुकी है और हर दिन हजारों लोग जान दे रहे हैं.

मेडिकल प्रोफशेनल से जुड़ी मां जोकि लगातार कोरोना के मरीजों का इलाज कर रही थी। उसे कोरोना हो गया। उसे बचाया नहीं जा सका लेकिन जाते-जाते उसने अपनी बेटी को एक लास्ट मैसेज किया। जिसे पढ़कर किसी का भी दिल ही पसीज जाए. इस महिला डॉक्टर का नाम माधवी अया था। वो पहले इंडिया में डॉक्टर थीं। बाद में वो यूएस शिफ्ट हो गईं। 61 साल की माधवी वहां बतौर फिजिशियन असिस्टेंट काम करती थीं। वो ब्रुकलिन के Woodhull Medical Center में काम करती थीं। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में उनकी ड्यूटी थी। यहां कोरोना संक्रमित मरीजों का ट्रीटमेंट किया जा रहा था। 18 मार्च को उन्हें भी कोरोना से संक्रमित पाया गया.

हैरान करने वाली बात तो ये है कि अस्पताल की ओर से उन्हें सिर्फ सर्जिकल मास्‍क दिया गया था। जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में कोरोना के बढ़ते प्रकोप के कारण डॉक्टर्स और नर्सों के पास बचने के लिए भी सुविधाएं नहीं हैं। इसके बाद माधवी को लॉन्ग आइलैंड ज्यूश मेडिकल सेंटर भेज दिया गया। जहां 11 दिनों बाद उनकी मौत हो गई।यह अस्पताल माधवी के घर से महज 3 किलोमीटर दूर था। लेकिन फिर भी उनसे कोई नहीं मिल पाया। डॉक्टर्स ने माधवी के परिवार के किसी सदस्य को उनसे नहीं मिलने दिया। वो दिल की मरीज थीं.

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These are the last texts of a hospital worker to her daughter. Madhvi Aya, who had been a doctor in India, worked in an emergency room in Brooklyn that was battered by the coronavirus. But within days of her last shift as a caregiver, she became infected. Aya, 61, was moved to a hospital less than 2 miles from her husband and 18-year-old daughter on Long Island, but they were not allowed to visit her. In a text with her family, she described horrible chest pain from trying to get out of bed. As she grew sicker, her texts came less frequently and in short, sporadic bursts. Her last message to her daughter was, “Mom be back.” She could not keep that promise. Front-line health care workers face a high risk of contracting the coronavirus, and scores have become sick. Aya’s text messages and her family’s account of her final days reveal a woman who spent much of her life devoted to medicine before succumbing to the cruel and familiar arc of a patient with Covid-19. Her early mild symptoms and quarantine at home were followed by a rapidly escalating illness and long waits for care, until she died alone. Read more at the link in our bio.

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मिन्नोली बताती है कि उसने कभी नहीं सोचा था कि इतनी जल्‍दी मां छोड़कर चली जाएगी। मिन्‍नोली कहती हैं, ‘मुझे यकीन नहीं हुआ कि अब मां हमारे साथ नहीं। इसलिए मैं मैसेज करती रही, खुद को ये दिलासा देने के लिए कि ये सच नहीं है। मां को और जीना था! मुझे ग्रैजुएट होते देखना था! मैं डॉक्टर बनती। मेरी शादी होती, बच्चे होते! दूसरों का इलाज करते-करते उन्हें भी कोरोना हो गया और वो भी चल बसी। ऐसे बहुत से डॉक्टर्स और नर्सें लोगों का ध्यान रखते-रखते, कोरोना से लड़ते-लड़ते दुनिया से अलविदा कह चुके हैं। उनके काम को सलाम, उन्हें सलाम, उन्हें शत-शत नमन, जिन्होंने अपनी परवाह किए बिना हम लोगों के लिए अपनी जान दे दी।

इसके कारण उनकी हालात बेहद खराब थी। उनकी बेटी मिन्नोली ने उन्हें कुछ दिनों पहले मैसेज किया था। मिन्नोली डॉक्टर की पढ़ाई कर रही हैं। मां-बेटी के इस मैसेज का स्क्रीनशॉट काफी वायरल हो रहा है। माधवी के पति राज कहते हैं, ‘वो हमेशा हर दिक्कत में परिवार के साथ खड़ी रही, लेकिन जब वो बीमार हुई तो हम उसका साथ ना दे पाए।’इस मैसेज में माधवी ने अपनी इकलौती बेटी को लिखा है कि वो उससे बहुत प्यार करती हैं और जल्द ही वापस आएंगी।

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