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40 के बा’द अ’गर आप’के भी वैवा’हिक जी’वन में ब’ढ़ने ल’गी है दूरि’यां, तो ए’क बा’र आज’माकर दे’खें ये त’रीके…

हिंदी खबर

रि’श्ते में ज’ब थो’ड़ा लं’बा सम’य बी’त जा’ता है तो क’ई लो’ग थो’ड़ी दूरि’यां औ’र ऊ’ब महसू’स कर’ने लग’ते हैं। खास’कर ज’ब 40 की उ’म्र पा’र हो जा’ती है तो उ’न्हें लग’ता है, अ’ब तो जी’वन में को’ई उत्सा’ह ही न’हीं ब’चा है। ऐ’सा ख्या’ल आ’ने के पी’छे व’जह ब’हुत आ’म है कि लं’बे सम’य से आ’प ए’क- दू’सरे को स’मय ही न’हीं दे पा र’हे हैं। आ’पका जी’वन व्यस्तता’ओं में उल’झ ग’या है इस’लिए ब’हुत ज’रूरी है कि उ’म्र के इ’स प’ड़ाव प’र रि’श्ते को प्या’र से सीं’चते हु’ए च’लें। ए’क- दू’जे के लि’ए स’मय निका’लने, फि’क्र ज’ताने का ख्या’ल र’खें। अ’गली स्लाइ’ड्स में ब’ताए ग’ए तरी’कों से आप’का वै’वाहिक जी’वन 40 के बा’द भी र’हेगा प्या’र से भरा’पूरा। 

खु’द का ख्या’ल रख’ना
या’द कीजि’ए ज’ब आ’प अ’पने पार्ट’नर से पह’ली बा’र मि’ले थे या रि’श्ते के शुरुआ’ती दौ’र में आ’प खु’द का कि’तना ख्या’ल रख’ते थे। आ’प अ’पने बा’ल, त्व’चा, ड्रेस’अप, स’ब प’र ध्या’न दे’ते थे ले’किन जै’से- जै’से स’मय बी’ता आ’प इ’न स’ब ची’जों के प्र’ति नी’रस हो’ने ल’गे। य’दि आ’प फि’र से वै’से ही खु’द का ख्या’ल रख’ना शु’रु क’र दें’गे तो आ’प इ’तने सा’लों बा’द भी अप’ने पार्टन’र का ध्या’न आ’कर्षित क’रने में का’मयाब हो जा’एंगे।

न’या कर’ने का ज’ज्बा
40 की उ’म्र के बा’द जीव’न में आ’लस्य को इ’तनी आसा’नी से न अप’नाएं। अ’पने भी’तर कु’छ न’या कर’ने के ज’ज्बे को हमे’शा जिं’दा र’खें औ’र कोशि’श क’रें कि आ’प दो’नों सा’थ में कु’छ न’या सी’खें या फि’र कु’छ शु’रु क’रें। या’द की’जिए रि’श्ते के शुरुआ’ती दौ’र में आ’प कि’तना कु’छ क’रना चा’हते थे ले’किन आ’पके पा’स स’मय न’हीं था। अ’ब आ’पके पा’स स’मय है तो उ’न सा’री ची’जों को अ’ब सी’ख ली’जिए।

डे’ट ना’इट के लि’ए स’मय नि’कालें
मा’ना कि आ’प लो’ग दि’नभर सा’थ रह’ते हैं ले’किन को’शिश क’रें कि म’हीने में एक’बार डे’ट ना’इट के लि’ए ज’रूर सम’य नि’कालें। घ’र प’र आ’प अ’पनी व्यस्त’ताओं में व्य’स्त र’हते हैं। इस’लिए सोचि’ए य’दि आ’प ए’क रा’त सि’र्फ ए’क-दू’सरे के लि’ए सम’य निका’लकर क’हीं बा’हर जा’कर सा’थ में खा’ना खा’एंगे तो य’ह कित’ना अ’च्छा हो’गा औ’र नि’श्चित ही आ’प लो’गों के प्या’र को औ’र भी बढ़ा’येगा। 

अ’पनी गल’तियों को मा’नें
य’दि आप’को लग’ता है कि आ’पसे वा’कई ग’लती हो ग’ई है तो अ’पने पार्ट’नर से मा’फी मां’ग लें। ऐ’सा बि’ल्कुल भी न सो’चें कि अ’ब आ’प अनु’भवी हो चु’के हैं तो आ’पसे गल’तियां न’हीं हो स’कती है। य’दि आ’प गल’तियों को न’हीं मा’नेंगे तो आ’प लो’गों में ब’हस हो’ने लगे’गी। लं’बे सम’य त’क रि’श्तों में ख’टास ब’नी रहे’गी। इस’लिए अप’नी गल’तियों के लि’ए अप’ने पार्ट’नर से मा’फी मां’गे। ऐ’सा क’रने से आ’पके पा’र्टनर की न’जरों में आप’का सम्मा’न ही बढ़े’गा।