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अब 18 नही बल्कि इतनें उम्र में होगी ल’ड़कियों की शादी? मोदी सरकार ने लिया बड़ा फै’सला…..

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पीएम मोदी ने 15 अ’गस्त, 2020 को 74वें स्व’तंत्र’ता दि’वस पर अपने सं’बोध’न में लड़’कि’यों के लिए शा’दी की न्यून’त’म आयु सी’मा पर पुन’र्विचा’र करने के उ’द्देश्य से एक स’मिति ग’ठित किए जा’ने की घो’षणा की थी। यह मु’द्दा काफी समय से वि’वा’द में है। भारतीय दं’ड सं’हिता 1860 में यह न्यू’नत’म उम्र 10 साल थी। बाद में समय-समय पर हुए सं’शोध’नों के बाद फि’ल’हाल यह 18 वर्ष है। ल’ड़कों के मा’मले में यह 21 वर्ष है। हा’लांकि कुछ लोग इसे भी भे’दभा’व मानते हैं और इसे लड़’के और ल’ड़कि’यों दोनों के लिए एक ब’रा’बर करने की द’लील देते हैं।

ल’ड़कि’यों के वि’वाह की न्यू’नत’म उम्र तय किए जाने के बा’व’जूद अलग-अलग ध’र्मों में अ’पने-अ’पने री’ति-रिवा’ज और का’नून हैं। हिंदू वि’वाह का’नून, 1955 की धा’रा 5(3) के अनु’सार शादी के समय लड़’की की उम्र 18 व’र्ष और लड़के की 21 वर्ष होनी चाहिए। इसके बा’वजू’द का’नून की एक खा’मी का फा’यदा उ’ठा:कर इस देश में ला’खों बाल विवाह होते हैं। दरअसल, शा’दी की न्यू’नतम उम्र तो तय कर दी गई है लेकिन बा’ल विवा’ह तब तक अ’वैध नहीं है, जब तक कि दोनों में से कोई एक उसे ख’त्म करने के लिए का’नून का सहा’रा न ले।

यूनीसेफ के मु’ताबिक भारत में लगभग 15 लाख ल’ड़कियों की 18 साल की उम्र से पहले ही शादी कर दी जाती है। पूरी दुनिया में जितने भी बाल वि’वाह होते हैं उनमें से एक तिहाई योगदान हमारा है। इस तरह से बाल विवाह के मा’मले में भारत पहले नंबर पर है। एक अनुमान के मुताबिक 15-19 साल की 16 फीसदी ल’ड़कियों की शादी हो जाती है।

बाल विवाह को रोकने के अला’वा ल’ड़’कियों की शादी की उम्र ब’ढ़ाए जाने के पीछे कई और मजबूत तर्क दिए जाते हैं। कम उम्र में ग’र्भधा’रण से जच्चा-बच्चा दोनों की जिंदगी ख’तरे में पड़ती है। मातृ और शिशु मृ’त्यु द’र को कम करने के अ:लावा प्रधानमंत्री द्वारा गठित स’मिति कई और मु’द्दों पर विचार करेगी। 

समिति से’हतमंद मा’तृत्व और शादी की उम्र के बीच स’हसंबं’ध का परीक्षण करेगी। इसमें ग’र्भधार’ण से लेकर बच्चे के जन्म और उसके बाद जच्चा-बच्चा के पोषण पर खास जोर दिया जाएगा। इसके लिए शादी की उम्र को 18 से 21 किए जाने की संभावना पर भी विचार करेगी।