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नवरात्रि के 9 दिनों में देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए करें 9 महाउपाय

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जीवन की कोई भी सा’धना ब’गैर श’क्ति की साधना के पूरी नहीं हो सकती है. आप किसी भी देवता की पूजा करते हैं लेकिन यदि आपने शक्ति की सा’धना नहीं की तो आपकी पूजा अ’धूरी मानी जाती है. श’क्ति की सा’ध’ना का म’हाप’र्व नवरात्रि 17 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच म’नाया जाएगा. न’वरा’त्रि के 9 दिन दे’वी दुर्गा के न’वनि’ध रूप की आ’राध’ना के लिए सु’निश्चि’त किए गए हैं. आइए जानते हैं कि आखिर इस न’व’रात्रि पर हमें मां ज’गदंबे की सा’ध’ना-आ’राध’ना करते समय किन बातों का विशेष ख्या’ल रखना होगा. इनका ध्यान रखने से हमारी साध’ना शी’घ्र पूर्ण होगी और मा’ता का आ’शीर्वा’द हम सभी पर बरसेगा.

1. एक पवित्र स्थान पर माता की फोटो या मूर्ति को एक लाल कपड़े के आसन पर गंगा जल छिड़क कर स्था’पि’त करें. मा’ला-पु’ष्प आदि से उनका श्रृं’गार करें.
2. पूजा करते समय स्व’यं के लिए ला’ल रंग के आ’सन का प्रयोग करें. यह आ’सन ऊनी होना चाहिए. यदि ऊ’नी आ’स’न न उ’पल’ब्ध हो तो लाल रंग का कं’ब’ल इ’स्तेमा’ल कर सकते हैं. यदि लाल रंग का कं’बल भी उ’पलब्ध न हो तो कोई कंबल लेकर उसके ऊपर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर माता की साधना करें.
3. यदि संभव हो तो मां जगदंबे की साधना लाल रंग के कपड़े पहनकर ही करें और मस्तक पर रोली से लाल रंग का तिलक लगाएं. माता को शीघ्र ही प्रसन्न करने के लिए ‘ॐ ऐं हृीं क्लीं चामुण्डार्य विच्चै’ मंत्र का विशेष रूप से जप करें.

4. नवरात्रि में 9 दिन माता के दरबार में धूप-दीप एक निश्चित समय पर जलाएं और उसे पूरे घर में भी दिखाएं. इससे घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाएगी.
5. माता को प्रसाद में गाय का दूध शहद डालकर विशेष रूप से चढ़ाएं. पाठ करने के पश्चात इस दूध को प्रसाद और माता के आशीर्वाद के रूप में ग्रहण करें. मां दुर्गा की पूजा में तुलसी दल या दूर्वा का प्रयोग भूलकर भी न करें.
6. नवरात्रि के नौवें दिन माता सरस्वती की विशेष रूप से साधना करें और विद्यादायिनी के सामने कलम, पुस्तक और वाद्य यंत्र आदि का पूजन करें.

7. नवरात्रि में यदि सेहत साथ दे, तभी 9 दिनों का पूरा व्रत रखें अ’न्यथा न’वरात्रि के पहले, चौथे और आठवें दिन का उपवास ही रखें. नवरात्रि के आठवें या नौवें दिन, जैसी आपकी मान्यता हो, उसके अनुसार विधि-विधान से हवन अवश्य करना चाहिए.
8. नवरात्रि में पहले दिन से लेकर अंतिम दिन तक, प्र’तिदिन एक कन्या का अथवा अष्टमी या नवमी, जिस दिन भी आप कन्या पूजन करते हों, 9 कन्याओं का पूजन करें.
9. नवरात्रि में सभी व’र्णों की कन्या को देवी स्वरूप मा’न’कर पू’जन का वि’धान है. जैसे ज्ञान की प्राप्ति के लिए ब्रा’ह्मण क’न्या को, बल के लिए क्ष’त्रिय क’न्या को, ध’न प्रा’प्ति के लिए वै’श्य कन्या को और रोग मुक्ति के लिए शूद्र कन्या का विशेष रूप से पूजन करना चाहिए.