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आखिर निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में क्यों कहा- ‘हमारा वतन डल लेक में खिलते कमल जैसा…’

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार 2.0 का दूसरा बजट पेश कर चुकी हैं. वित्त मंत्री के हाथ में एक बार फिर लाल कपड़े में बंधा बही-खाता दिखा. आपको बता दें की बही-खाते का चलन वही लेकर आई थीं. पिछले साल वित्त मंत्री बनी निर्मला सीतारमण ने 5 जुलाई, 2019 को पहली बार देश का बजट पेश किया था. इसे नाम दिया गया था बही-खाता. उसी बही-खाते को लेकर वह दूसरी बार लोकसभा में बजट पेश कर रही हैं. आपको बता दें बजट पेशी के दौरान निर्मला सीतारमण ने हमारा वतन डल लेक में खिलते कमल जैसा कहा. आइये आपको बताते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी.

बजट 2020 को पेश करते हुए निर्मला सीतारमण ने कश्मीर का जिक्र करते हुए एक कश्मीरी कविता पढ़ी. निर्मला सीतारमण ने जो शेर पढ़ा वह कश्मीर के मशहूर कवि दीनानाथ कौल नदीम की कविता संग्रह का है. कवि दीनानाथ कौल कश्मीरी साहित्य के एक आदर्श और दिग्गज कवि हैं. ”हमारा वतन खिलते शालीमार बाग जैसा, हमारा वतन डल झील में खिलते कमल जैसा, नौजवानों के गर्म खून जैसा, मेरा वतन, तेरा वतन, हमारा वतन-दुनिया का सबसे प्यारा वतन. निर्मला सीतारमण यह बताने चाह रही थीं कि पीएम किसान योजना से किसानों का फायदा हुआ। किसानों की भलाई के लिए सरकार 16 सूत्री योजना पर काम कर रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और हम अपने लक्ष्य को हासिल करके रहेंगे।

उन्होंने इस कविता का हिन्दी अनुवाद बताया – निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट देश की उम्‍मीदों को पूरा करने वाला है. भारत की अर्थव्‍यवस्‍था की बुनियाद बेहद मजबूत है. जनता को मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर पूरा भरोसा है. जीएसटी के जरिये टैक्‍स का जाल खत्‍म हुआ है. जीएसटी देश का सबसे क्रांतिकारी सुधार है. जीएसटी की वजह से लोगों को हर महीने चार प्रतिशत की बचत होती है. सरकार महंगाई को काबू करने में कामयाब रही.

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