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आज श’रद पू’र्णिमा के दिन इस दि’शा में छु’पा कर ऱख दें 101 रु’पयें, सात पी’ढ़ियों तक नही होगी पै’सों की क’मी…

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पै’सा एक ऐ’सी ची’ज हैं जि’ससे स’भी को मोह’माया हो’ती हैं. इस’के बि’ना जी’वन की क’ल्पना भी न’ही की जा सक’ती हैं. खास’कर कि आ’जकल के महं’गाई के ज’माने में तो ये पै’सा ब’हुत ही ज्या’दा मा’यने रख’ता हैं. ऐ’से में ह’र कि’सी की ब’स य’ही कोशि’श हो’ती हैं कि उ’से ये पै’सा ज्या’दा से ज्या’दा मा’त्रा में मि’ल जा’ए. ले’किन ह’र कि’सी का भा’ग्य इत’ना म’जबूत न’हीं हो’ता हैं. क’ई बा’र तो उ’न्हें क’ड़ी मेह’नत क’रने के बा’द भी पै’सा हासि’ल नही हो’ता हैं. ऐ’सा अ’क्सर बु’री कि’स्मत की व’जह से हो स’कता हैं. कु’छ मा’मलो में तो घ’र में र’खा पै’सा भी बु’रे भा’ग्य की व’जह से ख’र्च हो जाता हैं. इ’सी बा’त को ध्या’न में र’खते हु’ए आ’ज ह’म आ’पको घ’र में पै’सो की ब’रकत ब’नाए र’खने के लि’ए एक ख़ा’स उपा’य ब’ताने जा र’हे हैं. य’दि आ’प इ’स उ’पाय को आ’जमा ले’ते हैं तो आ’पके घ’र पै’सो की क’भी को’ई क’मी नहीं हो’गी.

दो’स्तों आ’ज जो उपा’य ह’म आप’को ब’ताने जा र’हे हैं वो ब’हुत ही सा’र्थक साबि’त हो सक’ता हैं. इ’स उ’पाय के त’हत आ’पको अप’ने घ’र की ए’क ख़ा’स दि’शा में 101 रुप’ए छि’पा के रख’ने हों’गे. ऐ’सा क’रने के बा’द आ’पका भा’ग्य पै’सो के मा’मले में प्र’बल हो जा’एगा. फि’र आ’पके स’भी ध’न सं’बंधित का’र्य अ’च्छे से सं’पन्न हो जा’एंगे. इत’ना ही न’हीं इ’स उ’पाय को क’रने के बा’द आ’पके घ’र ध’न की आव’क हमे’शा ब’नी र’हेगी औ’र घ’र में मौ’जूद व’र्तमान ध’न में भी को’ई क’मी न’हीं आ’एगी. हा’लाँकि इ’स 101 रु’पए को आ’प को यूं ही न’हीं र’ख दे’ने हैं. ब’ल्कि इ’से ए’क ख़ा’स वि’धि से वि’शेष दि’शा में र’खना हैं.

इ’स वि’धि से र’खे 101 रुप’ए

ये उ’पाय आ’प शुक्रवा’र के दि’न क’रे, क्यों’कि इ’स दि’न मा’ता ल’क्ष्मी का दि’न भी हो’ता हैं. गौर’तलब हैं की मा’ता ल’क्ष्मी ध’न की दे’वी हो’ती है. ऐ’से में इ’स उपा’य को क’रते सम’य आ’पको इ’नका आ’शीर्वाद भी ज’रूर ले’ना हो’गा. सब’से पह’ले आ’प 100 रुप’ए का नो’ट और 1 का सि’क्का ले’कर 101 रु’पए तै’यार क’र ले. अ’ब इ’न पै’सो को मा’ता ल’क्ष्मी के चर’णों में र’खे. इस’के बा’द घी का दि’या ल’गाकर ल’क्ष्मीजी की आ’रती क’रे. अ’ब उ’नसे ध’न वृ’द्धि की विन’ती कर’ते हु’ए मा’था टे’के. इ’सके बा’द आ’रती इ’स 101 रुप’ए को दे. अ’ब ए’क ला’ल रं’ग का क’पडा ले और इ’स 101 रुप’ए को इ’समें बाँ’ध क’र घ’र की पू’र्व दि’शा में छि’पा दे. इ’से ऐ’सी ज’गह र’खे कि ये कि’सी को न’ज़र न’हीं आ’ए. इ’स उपा’य से आ’पकी कि’स्मत ते’ज़ हो जा’येगी. इस’से आ’पका भा’ग्य खुले’गा. औ’र घ’र में पै’सो की क’भी को’ई क’मी न’हीं हो’गी.