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पहली बार देश मंदी में, दूसरी ति’माही में जीडी’पी 8.6 प्रति’शत गिरने का अनुमान: आरबीआई

डेली न्यूज़

आरबी’आई के रिस’र्चर द्वारा तैयार की गई अध्य’यन रिपो’र्ट में कहा गया है कि भारत तक’नीकी रूप से 2020-21 की पहली छमा’ही में अपने इति’हास में पहली बार आ’र्थिक मंदी में चला गया है.

मुंबई: भार’तीय रि’जर्व बैंक (आरबीआई) के एक अधि’कारी ने कहा कि चा’लू वित्त वर्ष की दूस’री ति’माही (जुलाई-सितंबर) में देश का सक’ल घरेलू उत्पा’द (जीडीपी) एक साल पहले की तु’लना में 8.6 प्रति’शत घटने का अनुमान है.

इस तरह लगा’तार दो तिमा’हियों में जी’डीपी घटने के साथ देश पहली बार मंदी में घिरा है.

दरअ’सल, अर्थशा’स्त्र में जब लगा’तार दो या अधिक तिमा’हियों में जीडी’पी की वृद्धि दर निगे’टिव में आ जाती है तब इसे मंदी कहा जाता है.

कोविड-19 महा’मारी और लॉक’डाउन के असर से पहली तिमा’ही में 23.9 प्रति’शत का संकु’चन हुआ था.

दूसरी तिमा’ही के जीडी’पी के सर’कारी आं’कड़े अभी नहीं आए हैं पर केंद्रीय बैंक के अनुसंधा’नकर्ताओं ने तात्का’लिक पूर्वा’नुमान विधि का प्रयोग करते हुए अनु’मान लगाया है कि सितं’बर तिमाही में संकु’चन 8.6 प्रति’शत तक रहा होगा.

इन अनुसंधा’नक’र्ताओं के विचार बुध’वार को जारी आरबी’आई के मासिक बुले’टिन में प्रका’शित हुए हैं.

आरबी’आई ने पहले ही अनु’मान लगा रखा है कि चालू वित्त वर्ष में जी’डीपी में 9.5 प्रति’शत की गिरा’वट आ सकती है.

आरबी’आई के रिस’र्चर पंकज कु’मार द्वारा तैयार की गई अध्य’यन रि’पोर्ट में कहा गया है कि ‘भारत तक’नीकी रूप से 2020-21 की पहली छ’माही में अपने इति’हास में पहली बार आर्थि’क मंदी में चला गया है.

‘इको’नॉमिक एक्टि’विटी इंडेक्स’ यानी आ’र्थिक काम’काज का सूच’कांक शी’र्षक से लिए गए लेख में कहा गया है कि लगा’तार दूसरी तिमा’ही में आ’र्थिक संकु’चन होने का अनुमान है.

हा’लांकि इसमें यह भी कहा गया है कि गतिवि’धियां धीरे-धीरे सामा’न्य होने के साथ संकु’चन की दर कम हो रही है और स्थि’ति बेह’तर होने की उम्मीद है.