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दिवाली पटा’खों पर प्रति’बंध से शिवकाशी को नया झटका, अंधेरी रहेगी 8 लाख कर्मचा’रियों की दीवाली

डेली न्यूज़

  • पटा’खा का’रोबार से जुड़े 8 लाख काम’गारों की पर पड़ा आजि’विका का संकट
  • शिव’काशी में लग’भग 3,500 करोड़ रुप’ए का है पटाखों का सा’लाना कारो’बार

नई दिल्ली। कई भार’तीय शहरों में वायु प्रदू’षण एक बड़ी चिंता के रू’प में उभर रहा है, देश की आतिश’बाजी की राज’धानी शिव’काशी पहले से ही गर्मी का एह’सास करा रही थी। इसके बाद कोविड-19 महा’मारी आई, जिसने लग’भग दो महीने तक सख्त ताला’बंदी की जि’ससे बड़ी शा’दियों और सार्व’जनिक समा’रोहों को रोक दिया गया, एक प्रमु’ख बाजार के उद्यो’ग को लूट लिया।

जैसे ही अन’लॉक की प्रक्रि’या शुरू हुई, शिव’काशी आतिश’बाजी उद्यो’ग ने कुछ राहत की उम्मी’द करना शुरू कर दी थी, लेकिन महा’मारी के निरं’तर खतरे ने सभी उम्मी’दों पर पानी फेर दिया है, जैसे गणे’श चतुर्थी जैसे त्यो’हार बिना किसी धूम’धाम के गुजर गया।

अब, चल रहे त्यो’हारी सीजन पर रिवाइ’वल की उम्मीदें धूमि’ल होती दिख रही हैं। रा’ज्यों एवं केंद्र शासित प्रदे’शों जैसे राजस्था’न और दिल्ली से कर्ना’टक, ओडिशा और सिक्किम तक को’विड-19 के रोगि’यों के लिए किसी भी सम’स्या से बचने के लिए दिवा’ली और अन्य त्यो’हारों के दौरान पटाखों पर प्रति’बंध लगा दिया गया है, जो मुख्य रूप से श्वस’न प्रणा’ली को प्रभा’वित करने के लिए जाना जाता है।

जान’कारों की मानें तो इस फैस’ले से पटा’खा उद्योग को इस साल अके’ले 800 करोड़ रुप’ए से अधिक का नुक’सान हो सकता है। इसके अला’वा 8 लाख काम’गारों की आजी’विका की संभाव’नाएं खतरे में हैं।

तमिल’नाडु पटाखे और एमोरर्स मैन्युफै’क्चरर्स एसो’सिएशन (टैनामा) के अध्यक्ष गणे’शन पंरुजन ने बताया कि इस साल हम 800 करोड़ रुपए के नुक’सान का अनु’मान लगा रहे हैं। दो महीने के लॉक’डाउन और आदे’शों की संख्या में गिरा’वट ने हमें बुरी तरह से चोट पहुं’चाई है। तन’फामा के अनु’मान के अनु’सार तमिल’नाडु के विरुधु’नगर जिले में स्थित, शिव’काशी में पटाखों का सा’लाना कारोबार लगभग 3,500 करोड़ रुपए का है।

महा’मारी शुरू होने के बाद शिव’काशी निर्मा’ताओं का कहना है कि पटा’खों की मांग में 35 फीसदी से अधिक की गि’रावट आई है। उत्पा’दन इका’इयों को सोशल डिस्टें’सिंग का दिशानि’र्देशों और लॉक’डाउन के दौरान अपने घर जाने के का’रण 100 फी’सदी से कम लेबर फोर्स पर काम कर रही है। वो अभी तक काम पर नहीं लौटे हैं।

वका’शी स्थित भा’रतीय आतिश’बाजी निर्मा’ता संघ के महास’चिव टी. कन्नन ने कहा गोवा, महा’राष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्ना’टक जैसे राज्यों से इस साल गणेश चतु’र्थी के दौरान कोई ऑ’र्डर ना मिलने के कारण बिक्री में गिरा’वट आई है। शादि’यों को रद्द कर दिया गया था, त्योहा’रों को प्रतिबं’धित कर दिया गया था, मैन पॉव’र कम हो गई है। जिन’की वजह से हमें काफी नुकसान हुआ है।

विरगो फाय’रवक्र्स के एस. उलगना’थन ने बताया पहले ग्रीन दिवा’ली के कांसे’प्ट ने हमारी बिक्री को काफी प्रभा’वित किया। फिर महा’मारी आई, और पिछले वर्ष की तुलना में अब हमारे आदे’शों में 30 फीसदी से ज्यादा की गिरा’वट देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि हम व्यव’साय चला रहे हैं और करोड़ों रुपए का निवेश किया है। इस साल हम 100 करोड़ रुपए के नु’कसान लगा रहे हैं।

तनफा’मा के गणेशन पंजु’राजन के अनुसार, पटाखा प्रति’बंध लागू होने पर लग’भग 8 लाख कर्म’चारी प्रभा’वित होंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली, राज’स्थान और गुज’रात उन राज्यों ने भारत की गीन ट्रिब्यू’नल अदा’लत के उस आदेश को लागू किया है हां पर वायु गुण’वत्ता काफी खराब हो चुकी है। यह सभी राज्य कुल बिक्री में 20-25 फीस’दी के करीब योग’दान करते हैं।