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बड़ा खतरा:क्या प्लाज्मा थैरेपी से वायरस और खतरनाक स्वरूप पैदा करता है, जानिए क्या है सच……

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कोरोना महामारी से निपटने के लिए कारगर मानी जा रही प्लाज्मा थैरेपी को लेकर देश के कुछ चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने आगाह किया है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 रोगियों के इलाज में स्वस्थ हो चुके लोगों के प्लाज्मा के ‘अतार्किक तथा गैर-वैज्ञानिक इस्तेमाल’ को खतरनाक बताया है। इन वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे कोरोना वायरस के और खतरनाक स्वरूप पैदा होने की आशंका है।

इन चिकित्सकों व वैज्ञानिकों ने देश के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन को पत्र लिखा है। विशेषज्ञों ने कहा कि कोविड-19 रोगियों के इलाज में प्लाज्मा थैरेपी के इस्तेमाल को लेकर भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देश मौजूदा साक्ष्यों पर आधारित नहीं हैं।

टीका संबंधी मामलों के विशेषज्ञ गगनदीप कांग और सर्जन प्रमेश सीएस द्वारा हस्ताक्षर किए गए इस पत्र में प्लाज्मा थैरेपी के अतार्किक इस्तेमाल के चलते वायरस के और अधिक खतरनाक स्वरूप के पैदा होने की आशंका जताई गई है।

पत्र में यह लिखा गया है

पत्र में कहा गया है, ‘हम देश में कोविड-19 रोगियों के इलाज में, स्वस्थ हो चुके लोगों के प्लाज्मा के अतार्किक और गैर-वैज्ञानिक इस्तेमाल के बारे में आपको पत्र लिख रहे हैं।’ पत्र में लिखा है, ‘ऐसा सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के कारण हुआ है। हम आपसे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध करते हैं ताकि कोविड-19 रोगियों, उनके परिवारों, चिकित्सकों और कोविड-19 से उबर चुके लोगों को उत्पीड़न से बचाया जा सके।’ यह पत्र आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव और एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया को भी भेजा गया है। विजयराघवन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
डॉ. कांग व डॉ. प्रमेश सीएस ने मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार विजयराघवन से आग्रह किया कि वे इस मामले में तत्काल दखल दें और कोविड-19 मरीजों, कोरोना से उबर चुके लोगों व उनके परिवारों की प्रताड़ना रोकें।

पत्र में कहा गया है कि पिछले माह केंद्रीय स्वास्थ मंत्रालय ने वयस्क कोरोना मरीजों के इलाज को लेकर नई गाइडलाइन जारी की थी। इसमें कोरोना के मध्यम लक्षण दिखाई देने के दौरान ही प्लाज्मा थैरेपी को कारगर बताया था। सात दिन बाद इसके इस्तेमाल का कोई औचित्य नहीं है। जबकि देशभर के अस्पतालों में इसका धडल्ले से उपयोग हो रहा है।

प्लाज्मा के लिए भटक रहे लोग

डॉ. कांग व डॉ. प्रमेश ने अपने पत्र में कहा है कि कोरोना मरीजों के परिजन प्लाज्मा पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। उनकी पीड़ा को समझा जा सकता है, क्योंकि वे अपने प्रियजन को बचाने के लिए हरसंभव उपाय करना चाहते हैं और डॉक्टर इसके इस्तेमाल की सिफारिश कर रहे हैं।

गंभीर मरीजों के इलाज व मौतें कम करने में कारगर नहीं

यह पाया गया कि प्लाज्मा थैरेपी गंभीर कोरोना मरीजों के इलाज या मौत का खतरा कम करने में कारगर नहीं है। प्लाज्मा थैरेपी में कोरोना से उबर चुके व्यक्ति के रक्त से एंटीबॉडी निकाली जाती है और उसे संक्रमित व्यक्ति को दिया जाता है। पत्र में कहा गया है कि आईसीएमआर ने देश के 39 अस्पतालों में इसका पहला परीक्षण किया था। इसमें पाया गया कि कोरोना के गंभीर मरीजों या मौत के खतरे में इससे कोई असर नहीं पड़ा। इसके बाद 11,588 मरीजों पर इसका अध्ययन किया गया। इसमें भी मौतों में कमी या अस्पताल से जल्दी छुट्टी होने जैसी स्थिति नहीं बनी।