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मैं न दया की भीख मांगता हूं और न किसी नरमी की अपील: SC में प्रशांत भूषण ने महात्मा गांधी का कथन क्यों दोहराया

हिंदी खबर

कोर्ट की अवमानना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को अपने बयान पर पुनर्विचार करने के लिए दो से तीन दिन की मोहलत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को प्रशांत भूषण से कहा कि वह न्यायालय की अवमानना वाले ट्वीट को लेकर माफी नहीं मांगने वाले अपने बयान पर पुनर्विचार करें और इसके लिए उन्हें दो से तीन दिन का समय दिया गया है। मगर सुनवाई के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब प्रशांत भूषण ने गांधी के कथन को दोहराया और कहा कि मैं न दया की भीख मांगता हूं और न ही कोई नरमी की अपील करता हूं।

प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- ट्वीट आवेश में नहीं किए, मैंने अपने वास्तविक विचार रखे

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने इस मामले में होने वाली सजा की प्रकृति को किसी अन्य पीठ के पास भेजने की अपील की थी। न्यायमूर्ति अरुण मिश्र की अध्यक्षता वाली पीठ ने प्रशांत भूषण की ओर से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे से कहा कि उन्हें इस मामले में दोषी ठहराये जाने संबंधी पुनर्विचार याचिका पर जब तक कोई फैसला नहीं आ जाता, तब तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। यानी उन्हें दी जाने वाली सजा लागू नहीं होगी।
प्रशांत भूषण ने सवोर्च्च न्यायालय को बताया कि उन्हें इस बात से पीड़ा हुई है कि उन्हें इस मामले में ‘बहुत गलत समझा गया’। उन्होंने कहा ‘मैंने ट्वीट के जरिये अपने परम कर्तव्य का निर्वहन करने का प्रयास किया है।’

अवमानना केस: प्रशांत भूषण को अपने बयान पर पुनर्विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दी 2-3 दिन की मोहलत

महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए प्रशांत भूषण ने कहा, ‘मैं दया की भीख नहीं मांगता हूं, और न ही मैं आपसे उदारता की अपील करता हूं। मैं यहां किसी भी सजा को शिरोधार्य करने के लिए आया हूं जो मुझे उस बात के लिए दी जाएगी, जिसे कोर्ट ने अपराध माना है, जबकि वह मेरी नजर में गलती नहीं, बल्कि नागरिकों के प्रति मेरा सवोर्च्च कर्तव्य है।’

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने ट्विटर पर न्यायाधीशों को लेकर की गई टिप्पणी के लिए 14 अगस्त को उन्हें दोषी ठहराया था। प्रशांत भूषण ने 27 जून को न्यायपालिका के छह वर्ष के कामकाज को लेकर एक टिप्पणी की थी, जबकि 22 जून को शीर्ष अदालत के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश एस. ए. बोबडे तथा चार पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को लेकर दूसरी टिप्पणी की थी।