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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा मेंअपने संबोधन में आज फिर किसानो से आन्दोलन खत्म करने कि अपील की

राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने संबोधन में एक बार फिर किसानो से आन्दोलन ख़त्म करने की अपील की. और उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हए कहा की दिल्ली की सीमाओं पर जमे आन्दोलनकारी किसानो को उन्होंने फिर से बातचीत का न्योता दिया है. पीएम ने खालिस्तान साजिश पर कहा की देश हर सिख के लिए गर्व करता है. उन्हें गुमराह करने से कभी देश का भला नहीं होगा.प्रधानमंत्री ने कहा कुछ बुद्धिजीवी होते है लेकिन कुछ लोग आन्दोलनजीवी हो गये है. देश में कुछ भी हो वो वहां पहुच जाते है,कभी परदे के पीछे और कभी फ्रंट पर ऐसे लोगो को पहचानकर हमें इनसे बचना होगा. ये लोग खुद आन्दोलन नहीं चला सकते है, लेकिन किसी का भी आन्दोलन चल रहा हो तो वहाँ पहुच जाते है, ये आन्दोलनजीवी ही परजीवी है जो हर जगह मिलते है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लाल बहादुर शास्त्री जी को याद करते हुए कहा की शास्त्री जी जब कृषि सुधार कार्य कर रहे थे तब उन्हें भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था. लेकिन वो पीछे नहीं हटे थे, तब लेफ्ट वाले कांग्रेस को अमेरिका का एजेंट बताते थे. आज मुझे ही गाली दे रहे है पीएम ने कहा की कोई भी कानून आया हो कुछ वक्त के बाद सुधार होते ही है. पीएम मोदी ने अपील करते हुए कहा की आन्दोलनकारियों को समझाते हुए हमें आगे बढ़ना होगा. गालियों को मेरे खाते में जाने दो, लेकिन सुधारों को होने दो. पीएम मोदी ने किसानो को भरोसा दिलाया की एमएसपी है, था और रहेगा. मंडियों को मजबूत किया जा रहा है. जिन 80 करोड़ लोगो को सस्ते में राशन दिया जाता है वो भी जारी रहेगा किसानो की आय बढ़ाने के लिए दुसरे उपाय पर बल दिया जा रहा है.

पीएम मोदी सदन में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का कथन पढ़ा, ‘हमारी सोच है कि बड़ी मार्किट को लाने में जो अड़चने है, हमारी कोशिश है की किसान को उपज बेचने की इजाजत हो.’ पीएम मोदी ने कहा की जो मनमोहन सिंह ने कहा वो मोदी को करना पड़ रहा है, आप गर्व कीजिये.

सदन में पीएम मोदी ने मैथिलिशरण गुप्त की कविता पढ़ कर सुनाई. उन्होंने कहा इस समय दुनिया की नजरे भारत की तरफ है. कोरोना काल में भारत शानदार तरीके से लड़ रहा है. कोरोना से लड़ाई का हक़ हिंदुस्तान को जाता है इसका यश किसी सरकार को नहीं जाता. हमारे कोरोना योद्धा ने मुश्किल समय में अपनी जिम्मेदारी निभाई है जिस पर हमें गर्व होना चाहिए.

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, ‘हमारा लोकतंत्र किसी भी मायने में वेस्टर्न इंस्टिट्यूशन नहीं है यह एक ह्यूमन इंस्टीट्यूशन है, भारत का इतिहास लोकतान्त्रिक मूल्यों से भरा हुआ है, प्राचीन भारत में 81 गणतंत्रों का वर्णन हमें मिलता है. आज देशवासियों को भारत के राष्ट्रवाद पर हो रहे हमलो से बचाना जरुरी है. भारत का राष्ट्रवाद न तो संकीर्ण है, ना ही आक्रामक है. ये सत्यम शिवम् सुन्दरम के मूल्यों से प्रेरित है’. प्रधानमंत्री मोदी ने सदन में बताया कि ये शब्द नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के है. उन्होंने ये भी कहा कि हमें दुनिया से लोकतंत्र सीखने की जरुरत नहीं है, भारत मदर ऑफ़ डेमोक्रेसी है. जब देश में आपातकाल लगा, तो न्यायपालिका और देश की क्या हालत थी. सभी को पता है लेकिन देश का लोकतंत्र इतना ताकतवर है किआपातकाल को भी हमने पार कर दिया.