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प्रधानमंत्री का नया ऐलान : तीनों कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर अफवाह और गुमराह से किया सचेत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तीनों कृषि सुधार कानूनों के विरोध के नाम पर अफवाह और गुमराह किये जाने के खिलाफ देश को सचेत किया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि नए कृषि कानून अनिवार्य नहीं हैं. ये बंधन नहीं हैं, बल्कि वैकल्पिक है. कानूनों को जो नहीं अपनाना चाहते हैं, उनके लिए पुरानी व्यवस्था का विकल्प खुला है. किसानो को यह भरोसा देने के साथ ही प्रधानमंत्री ने आन्दोलनकारी किसानो से वार्ता की मेज पर सरकार के साथ मिलकर समाधान निकालने का आग्रह भी किया है. इसी के साथ किसान आन्दोलन की आड़ में राजनितिक एजेंडा आगे बढ़ाने के प्रयासों पर तीखा हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने साफ़ कहा कि आन्दोलनजीवी किसान आन्दोलन को अपवित्र कर रहें हैं. प्रधानमंत्री के जवाब के बाद लोकसभा में ध्वनिमत से धन्यवाद प्रस्ताव पारित हो गया है. लोकसभा में कांग्रेस के हंगामे और टोका टाकी के बीच धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कृषि कानूनों के खिलाफ भ्रम और झूठ फैलानें, इनके खिलाफ जारी आन्दोलन से लेकर देश के कृषि क्षेत्र को बदलने के लिए इनकी जरुरत से जुड़े तमाम पहलुओं का विस्तार से उल्लेख करते हुए विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये भी कहा कि किसी न किसी को जिम्मेदारी लेनी होती है और देश की जरुरत के हिसाब से फैसले लेने होते है यथास्थिति वाली सोच ने देश की प्रगति को रोकने में बड़ी भूमिका निभाई है.देश सिर्फ फीता काटने से नहीं चलता है.हमें बदलाव के लिए हर कदम उठाना चाहिए.गलती हो सकती है, लेकिन यदि उद्देश्य सही है तो परिणाम सही मिलेगा.

पीएम मोदी ने ‘ चर्चिल सिगार असिस्टेंट ‘ सीएए का जिक्र किया.तमिलनाडु में तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विस्टन चर्चिल को सिगार पहुचाने के लिए यह पद सृजित किया गया था.और आजादी के कई साल बाद तक यह बना रहा मोदी ने कहा ठहरा हुआ पानी बीमारी देता है और चलता जल उर्जा बनाता है.राजा राम मोहन राय, इश्वर चन्द्र विद्यासागर, ज्योतिबा फुले और अम्बेडकर नें सुधारों की दिशा में कदम बढ़ने का साहस दिखाया था.