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पा’ना चाह’ते है काम’याबी: तो छो’ड़ दें ये आ’दतें, हों’गे सफ’ल औ’र सु’खी….

धार्मिक खबर

Chanakya Niti Hindi: अर्थशा’स्त्री औ’र नी’ति शा’स्त्र के महा’न ज्ञा’नी आ’चार्य चा’णक्य ने कु’छ ऐ’सी बा’तों का उल्ले’ख कि’या है जि’नका पा’लन कर’के म’नुष्य स’फल ए’वं सु’खी जी’वन व्यती’त क’र स’कता है. चा’णक्य के मुता’बिक को’ई व्य’क्ति ज’ब ग’लत रा’स्ते प’र निक’ल जा’ता है या ग’लत बा’तों का अनु’सरण क’रता है तो सफल’ता उस’से दू’र भा’गती है.

ऐ’सी ही ए’क आद’त है झू’ठ बो’लना. ए’क स’च को छिपा’ने के लि’ए व्य’क्ति को क’ई झू’ठ का स’हारा ले’ना पड़’ता है ले’किन फि’र भी ए’क ना ए’क दि’न स’च सा’मने आ ही जा’ता है. झू’ठ के ब’ल प’र कु’छ सम’य के लि’ए खु’शी या सफल’ता मि’ल सक’ती है लेकि’न वो स्था’ई न’हीं हो’ती. चा’णक्य के अनु’सार बु’री आ’दतों को छो’ड़कर अ’च्छी आ’दतों को अ’पनाने वा’ला व्य’क्ति जी’वन में सफ’लता प्रा’प्त क’र स’कता है. 

चा’णक्य के अनु’सार झू’ठ बो’लना ब’ड़ा पा’प है. ये ए’क ऐ’सी आ’दत है जि’ससे क’भी कि’सी का भ’ला न’हीं हो सक’ता. हा’लांकि, झू’ठ का स’हारा लेक’र कु’छ स’मय के लि’ए ला’भ ज’रूर मि’ल सक’ता है ले’किन स’च्चाई सा’मने आ’ने के बा’द स’ब कु’छ व्य’र्थ हो जा’ता है. झू’ठ बो’लने वा’ले व्य’क्ति को समा’ज में मा’न-सम्मा’न की प्रा’प्ति न’हीं हो’ती. चा’णक्य के मुता’बिक झू’ठ ज्या’दा दि’न त’क न’हीं च’लता. सच्चा’ई से सा’मना हो’ते ही झू’ठ का प’र्दा उ’ठ जा’ता है.

चा’णक्य का मा’नना है कि आ’त्मविश्वास सफ’लता की स’बसे प’हली सी’ढ़ी है. जि’स इंसा’न में आत्म’विश्वास की क’मी हो’ती है व’ह हमे’शा अप’ने आप’को दूस’रों से नी’चा समझ’ता है. जि’स व्य’क्ति में झू’ठ बो’लने की आद’त हो’ती है उस’में आत्म’विश्वास की क’मी हो’ती है. आत्मवि’श्वास की क’मी के का’रण व्य’क्ति को छो’टी से छो’टी सफ’लता पा’ने में भी क’ष्ट उठा’ना प’ड़ता है.

चाण’क्य के अनु’सार जो व्य’क्ति अ’पने फाय’दे के लि’ए झू’ठ का स’हारा ले’ते हैं उ’न्हें मा’न-सम्मा’न प्रा’प्त न’हीं हो’ता. झू’ठ बो’लने वा’लों को स’माज में अप’मान का साम’ना कर’ना पड़’ता है.