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रामायण में ‘राम’ का किरदार निभाने वाले अभिनेता अब दिखने लगे है कुछ ऐसे

राम के बिना रामायण की कल्पना एकदम कोरी लगेगी. आपको 90 के दशक में चलने वाले रामानंद सागर की रामायण तो याद ही होगी. अगर नहीं तो चलिए हम आपकी धुंधली यादों को ताज़ा करने की कोशिश करते हैं. इस सीरियल में तो वैसे कई हजार लोगों ने काम किया है. लेकिन कुछ कलाकारों की सुंदर कलाकारी ने आज भी आपको याद रखने में मजबूर कर रखा है. आपके या हमारे मन में जिनकी छवि आज भी उसी तौर पर विराजमान है आज हम रामायण सीरीयल से जुड़े कुछ उन्ही पात्रों के बारे में बात करेंगे.

26 जनवरी 1987 के दिन दूरदर्शन टीवी पर प्रसारित रामायण पूरे देश का पसंदीदा धारावाहिक हुआ करता था. रामायण की दीवानगी इतनी थी कि लोग खाना भूले सकते थे, काम करना भूल सकते थे, पैसे कमाना भूल सकते थे, लेकिन रामायण देखना नहीं भूलते थे. जिस दिन ये कार्यक्रम दूरदर्शन पर प्रसारित होता उस दिन सड़के तिराहे चौराहे खाली होते थे.

गांव के गांव टीवी में नजरें गडाकर बैठ जाते थे. इस धारावाहिक के किरदारों ने उन्हें प्रसिद्धि तो दी ही पर एक नया नाम भी दिया और उसी नाम से दुनिया आज भी उन्हें जानती है. ये सीरियल इतना पॉपुलर था कि रामानंद सागर की रामायण का एक-एक किरदार लोगों को आज भी याद है. इन्हीं में सबसे पहला नाम आता है कलयुग के राम कहे जाने वाले अरुण गोविल का. अरुण गोविल ने जितनी सुंदरता के साथ रामायण में भगवान राम का किरदार निभाया कि लोग उनके फोटो लगाकर उनकी पूजा करने लगे. वो जहां जाते थे, उनके पैर छूने के लिए लोगों की लाइन लग जाती थी.

आइए जानते हैं अरुण गोविल की जीवनी से जुड़ी कुछ खास बातें- अरुण गोविल का जन्म 12 जनवरी 1958 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ था. पढ़ाई के दौरान ही वे नाटक किया करते थे. हालांकि, अभिनय में करियर बनाने के बारे में उन्होंने कभी नहीं सोचा था. अरुण वैसे तो मुंबई बिजनेस करने आए थे लेकिन उन पर एक्टिंग का जुनून सवार हो गया और उन्होंने एक्टिंग का दामन थाम लिया. अरुण भले ही लोगों के लिए राम हों, लेकिन उससे पहले उन्होंने फिल्म पहेली जो 1977 में आई थी, उसमें पहली बार नजर आए थे.

आपको बता दें कि सीरियल में राम का किरदार हासिल करना अरुण गोविल के लिए आसान नहीं था. एक इंटरव्यू के दौरान अरुण गोविल ने बताया था कि कैसे ऑडिशन में रामानंद सागर ने पहले उन्हें रिजेक्ट कर दिया था. क्योंकि रामानंद सागर का ऐसा मानना था कि भगवान राम जिन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है ऐसे किरदार को परदे पर निभाने वाले इंसान में कोई भी बुरी आदत नहीं होनी चाहिए. लेकिन अरुण गोविल को सिगरेट पीने की लत थी. लिहाजा इस रोल को पाने के लिए अरुण ने सिगरेट की लत को छोड़ दिया.

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