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स’ड़क किनारे ते’जी से हिल रही थी लाल का’र, अं’दर वो दिखा जिसे देख हो जाएंगे…

हिंदी खबर

थो’ड़ी दे’र के लि’ए सो’चिए। आ’प सड़’क प’र से गुज’र र’हे हैं। त’भी आ’पको रा’स्ते में ए’क ला’ल रं’ग कि च’मचमाती का’र दि’खाई दे’ती है। सुन’सान स’ड़क प’र ख’ड़ी ये का’र अ’जीब ढं’ग से लगा’तार हि’ल र’ही है। इ’स हि’लती हु’ई का’र को दे’ख आप’के म’न में क्या विचा’र आए’गा? अधि’कतर लो’ग य’ही सो’चेंगे कि का’र के अंद’र ज’रूर कु’छ गड़’बड़ है। हो सक’ता है कि कु’छ तु’रंत पुलि’स को भी सू’चित क’र दें। अ’ब ऐ’सा ही कु’छ उत्त’र प्र’देश के गोर’खपुर में हु’आ। य’हां शिका’यत मि’लने प’र ज’ब पुलि’स हि’लती का’र के पा’स आ’ई तो अं’दर का नजा’रा दे’ख दं’ग र’ह ग’ई।

हि’लती हु’ई का’र को दे’ख अच’रज में प’ड़े लो’ग

दरअ’सल गोर’खपुर में स’ड़क के कि’नारे ए’क ला’ल रं’ग की का’र ख’ड़ी थी। ज’ब ये अचा’नक हि’लने ल’गी तो आ’ने जा’ने वा’ले लो’ग अचा’नक रु’क ग’ए। उन्हों’ने खिड़’की में दे’खने की को’शिश की लेकि’न शी’शे प’र चा’रों तर’फ का’ली फि’ल्म ल’गी थी। इस’के बा’द कि’सी ने तु’रंत पु’लिस को सू’चना दे दी।

खि’ड़की खु’ली तो दि’खा है’रान क’र दे’ने वा’ला न’जारा

पुलि’स ज’ब इ’स हिल’ती हु’ई का’र के पा’स आ’ई तो उन्हों’ने गा’ड़ी की खि’ड़की खट’खटाई। ये खि’ड़की खु’ली तो ल’ड़का ल’ड़की आ’पस में अश्ली’ल हर’कत क’रते हु’ए दिखा’ई दि’ए।